कोरोनाके संकट की घड़ी में क्या कर रहा है संघ?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघमें कुछ गीत गाये जाते हैं; जो संघगीत के नाम से जाने जाते हैं। उनमें से एक प्रसिद्ध गीत है – तन से मन से धन से,तन मन धन जीवन से हम करे राष्ट्र आराधन… संघ कार्य में स्वयं को तन-मन-धन से झोक देना ही संघ के स्वयंसेवक जानते हैं।

यह विश्व का एकमात्र ऐसा संघटन है जिसके लिए हजारों स्वयंसेवक अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर देते हैं। देशपर जबभी कोई विपत्ति आती है तब संघ के स्वयंसेवक पूरी ताकत से मद्त के काम में जुट जाते हैं यह इतिहास है, वर्तमान है और भविष्य में भी होते रहेगा, इसमें संदेह नहीं। अखंड जनसेवा का संस्कार संघ की शाखा में ही दिया जाता हैं। गुजरात में का भूकंप हो या महाराष्ट्र में की किल्लारी का, मोरवी का महाजल प्रलय हो या केदारनाथ की दुर्घटना। सरकारी यंत्रणा से भी पहले वहाँ सहायता पहुँचानेवाले संघ के स्वयंसेवक ही थें। यह सब प्रसिद्धि या बड़प्पन दिखाने के लिए नहीं। नाममात्र की मद्त कर सोशल मीडिया में चमकनेवाली छोटी – मोटी, संस्था-संघटन संघ के काम से सीखें। प्रसिद्धि की चमक से सदैव दूर रहकर सेवा यज्ञ में जुटें लाखों स्वयंसेवकों ने सदा समाज को दिया ही हैं। आज कोरोना की संकट की घड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत और सरकार्यवाह भय्याजी जोशी ने देश में के हजारों मुख्य शिक्षकों को संदेश दिया – ‘कोरोना के कारण संकट की घड़ी निर्माण हुई हैं। संघ का सेवा कार्य तुरंत प्रारंभ करें।’ सरसंघचालकजी का संदेश सब के लिए आदेश ही होता हैं। इस आदेश के अनुसार दिल्ली से गली तक के स्वयंसेवक सेवा कार्य में जुट गए।

किस राज्य में किस दल की सरकार हैं, जिन्हे मद्त की आवश्यकता हैं वे किस जाती – पंचायत, धर्म के हैं इसका कोई भेदभाव किए बिना स्वयंसेवक देशभर सेवाकार्य में जुटें हैं। इस संकट की घड़ी में संघ के किस प्रान्त में कौनसा सेवाकार्य चल रहा हैं, इसकी पूरी जानकारी संघ के मुख्यालय और विश्व संवाद केन्द्र को रोज दी जाती हैं।इस जानकारी को देखने से पता चलेगा कि संघ ने अल्प काल में सेवा का कितना बड़ा काम खड़ा किया हैं।

दिल्ली में के एक दिव्यांग मुस्लिम युवक ने लॉकडॉऊन में उसकी स्थिति कैसे बेबस हुई हैं इसकी जानकारी फेसबुकपर डाली। संघ के एक पदाधिकारी ने तुरंत इसकी दखल ली। स्थानीय स्वयंसेवको को इसकी सूचना दी। संघ के कार्यकर्ताओं ने वहाँ जाकर वहाँ के ७२ दिव्यांगों के भोजन की व्यवस्था की। दिली में वारांगनाओं की बस्ती में कई परिवार मुश्किल में फँसे थें। संघ के स्वयंसेवको ने उनके भी भोजन की व्यवस्था की। उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में संघ के कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज कोरोना का सामना करने के काम में जुटी हैं।

झोपड़पट्टी, दलित बस्तियाँ, आदिवासी पाडो (बस्तियों) में स्वयंसेवक भोजन, कपड़े, दवाईयाँ बाँट रहें हैं। दिल्ली में संघ के १३० केंद्रों से भोजन बाँटा जा रहा हैं। अकेले रहनेवाले जेष्ठ नागिरको की सहायता के लिए १२७ केन्द्र खोले गए हैं। मुंबई में एक लाख लोगों को रोज दो समय का भोजन बाँटा जा रहा हैं। इसमें से ४० हजार पाकिट मुंबई महापालिका को दिए जाते हैं।

देशभर में संघ के कार्यकर्ता जो काम कर रहें हैं वह केवल भोजन वितरित करने तक सीमित नहीं हैं। गाँव की सफाई, दवा छिड़कना, स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन, दवाइयाँ, मास्क बाँटना भी चल रहा हैं। काम कर रहें पुलीस को अल्पोहार, भोजन, पानी की बोतल बाँटना भी जारी हैं। हजारों स्वयंसेवकों ने रक्तदान किया हैं। संघ की लोककल्याण समिति ने की स्थानों पर ‘पीपीई किट’ भी बाँटी हैं। संघ के स्वयसेवक हमारी बहुत मद्त कर रहें हैं ऐसी भावना नगरपालिका, महापालिका, पुलीस यंत्रणा, आरोग्य सेवा और राज्य शासन के अधिकारी और अन्य व्यक्त कर रहें हैं।

स्वयंसेवक जान जोखिम में डालकर भी समाजसेवा करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। सेवा कार्य में संघ मुंबई, पुणे, ठाणे, नागपुर, औरंगाबाद ऐसा कोई भेदभाव स्वयंसेवक नहीं करतें। संघ के मुख्यालय नागपुर में सैकड़ों स्वयंसेवक असंख्य गरिबों के लिए देवदूत साबित हो रहें हैं। ‘यूथ फॉर सेवा’ उपक्रम में युवा स्वयंसेवक प्रसंसनीय काम कर रहें हैं।

इन सब कामों के लिए धन की आवश्यकता होती हैं। समाज में के दानदाता संघ के काम में उदारता से मद्त करतें हैं। संघ मदत देनेवाले इन लाखों – करोड़ों हाथों को मदत की आवश्तकता वाले हाथों से जोड़ने के विश्वसनीय माध्यम के रूप में काम करता हैं। संघ के इस सेवा कार्य को शत – शत प्रणाम!