कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पारित प्रस्ताव

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वर्धा : राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जन्मजयंती पर आज कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक, ऐतिहासिक सेवाग्राम, वर्धा में आयोजित । सेवाग्राम, जिसकी स्थापना बापू ने साल 1936 में की , एक दशक से अधिक समय तक बापू की
कर्मभूमि रही। नौ दिनों की व्यापक मंत्रणा के बाद यहीं से कांग्रेस कार्यसमिति ने 14 जुलाई,1942 को ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का आगाज़ किया था। इसके एक माह बाद, महात्मा गाँधी के नेतृत्व में ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ ने देश भर में एक जनक्रांति का आकार ले लिया। समूचे देश में ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा गूँजने लगा और पूरा भारत एक आवाज़ और एक निश्चय के साथ अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फ़ेकने के लिए इस आंदोलन की जनक्रांति में शामिल हुआ।

भाजपा के पितृ संगठन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सदैव बापू की विचारधारा के विरुद्ध निरंतर षड्यंत्र किया है। कांग्रेस कार्यसमिति यह रेखांकित करती है कि आज वही पाखंडी ताकतें, सत्ता की स्वार्थ सिद्धि के लिए बापू की विचारधारा अपनाने का ढ़ोंग रच रही है। जबकि सच्चाई यह है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा नफ़रत, बँटवारे और घृणा का वातावरण बनाया गया था और उसी के परिणाम स्वरुप राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की दुखद हत्या हुई।

कांग्रेस कार्यसमिति ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री व गांधी जी के अनुयायी, श्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें भावांजलि अर्पित की। कांग्रेस कार्यसमिति ने इस बात पर बल दिया कि ‘जय जवान, जय किसान’ एक नारा नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी के लिए जीवन पद्यति का मार्ग है।

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समय की माँग है कि एक नए स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत सेवाग्राम से हो – एक ऐसी मोदी सरकार के ख़िलाफ़ जिसने देश में बँटवारे और पूर्वाग्रह का वातावरण पैदा किया है, जिसकी राजनीति का आधार भय व डर है, जिसकी कार्यशैली ध्रुवीकरण पर आधारित है, जिसकी सोच हर आवाज़ को दबाने व हर विरोध का गला घोंटने की है, जिसका चरित्र हिन्दुस्तान के बहुलतावाद को समाप्त कर उन्माद फैलाने का है। भारतवर्ष सदैव भिन्न-भिन्न भाषाओं, धर्मों, संस्कृति व संस्कारों का एक बहुलतावादी गुल्दस्ता रहा है। इसमें जड़ता का कोई स्थान नहीं। मोदी सरकार ने संवैधानिक परम्पराओं व मानवीय मूल्यों को कुचल, केवल प्रतिशोध की राजनीति की है, जिसकी नींव झूठ, धोखा, बेईमानी और छल की भाजपाई शैली पर आधारित है।

कांग्रेस कार्यसमिति का यह मानना है कि महात्मा गाँधी के जीवन मूल्यों और सिद्धान्तों को भाषणों में व्यक्त करना तो आसान है, मगर सत्य-अहिंसा -सामजिक सद्बभाव की गांधीवादी विचारधारा को जीवन में आत्मसात करना उन
व्यकितयों के लिये असंभव है, जो महात्मा गाँधी के नाम में भी सिर्फ राजनैतिक अवसरवादिता खोजते हैं। आप बापू के चश्मे को राजनैतिक प्रचार पाने के लिए उधार तो ले सकते हैं, मगर उनके सिद्धांतों को अपनाए बिना उनके आदर्शों पर अमल नहीं कर सकते। कांग्रेस कार्यसमिति यह संकल्प लेती है कि खोखले आदर्शों व दोहरे चरित्र वाले ऐसे सब समूहों और व्यक्तियों को बेनक़ाब करेंगे, जिन्होंने कभी भी गाँधी जी के दिखाए सच्चाई, सहिष्णुता, समरसता और अहिंसा के प्रशस्त मार्ग को नहीं अपनाया।

महात्मा गाँधी ने भारत के साम्प्रदायिक व सामजिक सौहार्द्र के लिये अपने प्राणों की आहुति दी। जब समूचा देश बापू की जघन्य ह्त्या से आहत था, उसके छः सप्ताह से भी कम समय में प्रधानमंत्री, पंडित जवाहरलाल नेहरू, कांग्रेस व देश के वरिष्ठ नेता तथा गाँधी जी के सहयोगी सेवाग्राम में पुनः एकत्रित हुए और घृणा-बँटवारे के विषैले वातावरण के खिलाफ तथा देश को गांधीवादी विचारधारा पर चल एक सूत्र में बाँधने का आह्वान किया। पंडित नेहरू ने तब कहा था कि “हर प्रकार के खतरों से लड़ना और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना ही कांगेस का रास्ता है।” मौज़ूदा परिस्थिति में पंडित नेहरू का यह संदेश कांग्रेस संगठन के लिये और अधिक प्रासंगिक है।

कांग्रेस कार्यसमिति इस बात के लिए वचनबद्ध है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ही वह राजनैतिक दल है जो सच्चे अर्थों में भारत के समावेशीय, बहुलतावादी, धर्मनिरपेक्ष व उदारवादी चरित्र को आत्मसात और प्रतिबिंबित करती है। कांग्रेस ही है जो आत्मा की गहराई से ‘न्याय के सिद्धांत, उदारवाद, समानता और भाईचारे’ के प्रति अटूट रूप से कट्टीबद्ध है, जो
संविधान की प्रस्तावना में अंकित समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता व लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है। कांग्रेस कार्यसमिति यह संकल्प लेती है कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता इस बुनियादी संदेश को भारत के कोने कोने तक पहुंचायेगा, खासकर देश की युवा पीढ़ी तक।

महात्मा गाँधी का दृढ़ इरादा व विचार था कि हर आवाज़ को सुना जाए और उन सब ताकतों को निर्णायक तौर से परास्त किया जाए जो भारत के नागरिकों की उम्मीद व बढ़ते क़दमो को रौंदती व रोकती है। आज फ़िर, कांग्रेस कार्यसमिति
महात्मा गांधी की इस अटूट प्रतिबद्धता में अपना विश्वास दोहराती है। चुनावी राजनीति से आगे बढ़कर विचारधारा की यह लड़ाई अनवरत जारी रहेगी। कांग्रेस कार्यसमिति इन पवित्र उद्देश्यों के प्रति स्वयं को समर्पित करती है।

कांग्रेस कार्यसमिति ने समूचे राष्ट्र को आह्वान करते हुए कहा कि भारत के बुनियादी मूल्यों व सिद्धांतों की निडरता से एक जुट हो रक्षा करना ही वक़्त की मांग है। महात्मा गाँधी इन मूल्यों के लिए सदैव जिये, अडिग रहे और भारतीयता के इन्हीं मूल्यों की रक्षा हेतु उन्होंने कुर्बानी दी।

कांग्रेस कार्यसमिति ने सभी देशवासियों, विशेषतः युवाओं के लिए उद्घोष किया कि वो भय, डर, झूठ और धोख़े की राजनीति का निर्भीकता से मुक़ाबला करें -‘न झुकें ,न रुकें, जब तक मंज़िल प्राप्त ना हो जाए। ‘