ऐसा मुख्यमंत्री जो स्कूटर से जाता था ऑफिस

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पणजी : गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर की आज मृत्यु होगीई है. वह पिछले १ साल से कैंसर की बीमारी से जूझ रहे थे. सादगी, ईमानदारी और मुस्कुराहट भरी भाव भंगिमा. मनोहर पार्रिकर की शख्सियत ही कुछ ऐसी थी जो लोगों पर अपनी अलग छाप छोड़ देती थी.

मनोहर पर्रिकर को इसलिए भी जाना जाता है कि वे सीएम बनने के बाद भी अपने लंबरेटा स्कूटर से मुख्यमंत्री कार्यालय के लिए निकल जाया करते थे. उनके लिए जुझारू और कर्मठ शब्द नाकाफी लगते हैं. वे एक ऐसे सीएम थे, जिन्‍हें नाक में नली पहने ऑफिस आकर जरूरी काम करते देखा गया.

वह भाजपा और संघ के निष्ठावान कार्यकर्ता थे. उनकी जिजीविषा का अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) की सहयोगी रही बीजेपी को गोवा में मामूली जनाधार से सत्ता तक लाने का श्रेय पर्रिकर को ही दिया जाता है.

गोवा का बजट पेश करने से पहले मनोहर पर्रिकर ने कहा था, ‘परिस्थितियां ऐसी हैं कि विस्तृत बजट पेश नहीं कर सकता लेकिन मैं बहुत ज्यादा जोश और पूरी तरह होश में हूं.

13 दिसंबर 1955 को जन्मे पर्रिकर ने 1978 में आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजिनियरिंग में ग्रैजुएशन किया. वह किसी आईआईटी से ग्रैजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद देश के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले शख्स थे. पर्रिकर पहली बार 1994 में पणजी विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे.

राजनीती में आने से पहले पर्रिकर का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़ाव था. वह आरएसएस की नॉर्थ गोवा यूनिट में सक्रिय थे. वर्ष 2000 में वह पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री बने. उनकी छवि आम आदमी के सीएम के रूप में थी.

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गोवा की राजनीति में बीजेपी की जड़ें जमाने में पर्रिकर का योगदान काफी अहम रहा. 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च में उन्होंने ‘जनसंपर्क यात्रा’ नाम से जनता के बीच बड़ा अभियान चलाया. इसका नतीजा भी दिखा और पर्रिकर राज्य की 40 सीटों में से 21 पर बीजेपी का कमल खिलाने में कामयाब रहे.

मनोहर पार्रिकर अपने काम के प्रति बेहद निष्ठावान थे. वह पूरी ईमानदारी के साथ अपना काम करते थे. अपने काम के प्रति उनकी ईमानदारी का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि जब विपक्ष ने उनके तबियत का हवाला देकर उनके काम पर सवाल उठाया तो वह नाक में ड्रिप डालकर अपने ऑफिस आना शुरू कर दिया था. सिर्फ ऑफिस आना नहीं वैसे ही विकास के कार्यो को देखने फिल्ड पर भी गए.

उन्होंने अपने निजी जिंदगी में भी बेहद जुझारू होने का परिचय तब दिया जब सीएम बनने के एक साल के भीतर ही उनकी पत्नी का कैंसर से देहांत हो गया. इसके बाद बच्चों की जिम्मेदारी को संभालते हुए उन्होंने प्रदेश को संभाला.

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बीते कुछ वर्षों से जब खुद कैंसर से पीड़ित ‌थे. तब भी वे प्रदेश को संभाल रहे थे. जब वे कैंसर जैसी बीमारी से लड़ रहे थे और उनसे बीजेपी आलाकमान ने पूछा, उन्होंने यही कहा कि वह जल्द ठीक हो जाएंगे और अपना काम संभाल लेंगे.