ठाकरे सरकार, स्थगितियों में दमदार

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यदि आप सार्वजनिक निर्माण, शहरी विकास, चिकित्सा शिक्षा, जल आपूर्ति और स्वच्छता मंत्रालय के किसी भी विभाग में अधिकारियों को फोन कर पूछेंगे , तो आप बस  उनसे यही जवाब पायेंगे कि सरकारद्वारा नए विकास कार्यो को रोक दिया गया है.

अपनी सरकार कहकर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व की हर जगह सराहना हो रही है, लेकिन अगर मंत्रालय की सैर करे तो ‘ठाकरे सरकार-कामो को रोक दमदार’ की तस्वीर दिखाई देगी. तो यह स्थगन क्यों दिया जा रहा है? हम इसे समझ सकते थे यदि यह महाराष्ट्र के विकास या व्यापक हितों को देखते हुए दिया गया होता. बुलेट ट्रेन जैसी काफी महंगी योजनाओं को स्थगित करना भी समझा जा सकता है, क्योंकि रणनीतिक विरोध हो सकता हैं, और रणनीतिक संघर्ष के चलते किसी परियोजना की समाप्ति या उसे रोकने का समर्थन भी हो सकता हैं. इस तरह बडी परियोजनाओं में  करोडो रुपये खर्च करने का सवाल होता हैं. इस में अहम बात यह होती हैं कि क्या राज्य के अधिकोषपे इसका बोझ होगा और क्या राज्य का अधिकोष यह बोझ वहन करने की क्षमता रखता है? बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं की बुनियादी तौर पर जरूरत ही नहीं  हैं, इस भूमिका को भी स्वीकारा जा सकता है.

शिवसेना ने पहले ही इस भूमिका को अपना लिया था. शिवसेना सरकार आने के बाद प्रकल्प को रोक लगाया जाना उम्मीद से हट कर नहीं था. शिवसेना के शब्दों में कहें तो सेठजी के याने नरेंद्र मोदी – अमित शहा के गुजरात का इस प्रकल्प से जादा भला होना है. और तो और, शिवसेना वर्षों से मुंबई में मराठी बनाम गुजराती की भावुक राजनीति करते आयी है. इसी भावुक राजनीति के चलते भी महाराष्ट्र को गुजरात से तेजी से जोड़नेवाली इस परियोजना के बारे में शिवसेना के दिमाग में ईर्ष्या होना भी स्वाभाविक हैं. मूल रूप से बुलेट ट्रेन जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं का विरोध दूरदर्शिता की कमी का संकेत नहीं हैं, लेकिन इस पर कुछ समय बाद फिर लिखेंगे.

विकास कार्यों को रोकते हुए, यह भी जाना  चाहिए कि क्या आम जनता को नुकसान हो रहा हैं या नहीं? ठाकरे सरकार को इस बात का अहसास नहीं हैं, यह पहले आठ-दस दिनों में प्रतीत हो रहा है. ग्रामीण विकास और शहरी विकास विभाग की जिन गतिविधियों को रोक दिया गया है, वो आम आदमियोंसे संबंधित है. ये कार्य बहुत छोटे-छोटे होते हैं, लेकिन वे गांव के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण होते हैं. डेढ़-दो हजार आबादी के गांव में, नालियोंका निर्माण, फर्श निर्माण, सड़के आदी कार्य २५/१५ इस शीर्ष के अधीन किये जाते हैं. इन सभी कामों को स्थगित कर दिया गया हैं .  इससे हजारों गांवों में विकास कार्य बाधित होंगे. इसी तरह, महापालिकाओं, नगरपालिकाओं और नगर पंचायतो के क्षेत्रों में छोटे-छोटे काम बाधित हो गए हैं. राज्य में लाखों गरीब मरीज जो सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं, वे चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन हैं. चिकित्सा शिक्षा विभाग के अस्पतालोंसे संबंधित काम अभी रोक दिये है, जो की अतार्किक हैं. इसी तरह, पानी की आपूर्ति और स्वच्छता विभाग के अधीन १२ हजार ५०० करोड़ रुपए के कामो को भी रोक लगायी गयी है.

पंकजा मुंडे, विनय कोरे, धनंजय महाडिक, कल्याणराव काले और भाजपा से जुड़े नेताओं की चीनी फैक्टरियों को देवेंद्र फडणवीस सरकारने अंतिम चरण में 310 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी दी थी. नई सरकार ने इसे रद्द करने का फैसला किया है. बेशक, इस में  राजनीतिक ईर्ष्या ललामभूत हैं. गठबंधन सरकार के दौर में  कांग्रेस-एनसीपी से संबंधित चीनी फैक्टरियों को हजारों करोड़ की बैंक गारंटी जारी की गई थी. ये चीनी फैक्टरिया समय चलते साफ लडखडा गयी और वो करोडो का कर्ज ले डूबे. उन्हें जब ऋण की गारंटी देने की बात आई तब राज्य के अधिकोष का ध्यान नहीं रखा गया था. किंतु, आजही उसकी जरुरत क्यू महसूस हो रही हैं , यह बडी सोचनेवाली बात है. चीनी फैक्टरियों के अंतर्गत हजारों उत्पादक किसान आते हैं. ऋण गारंटी देने से यदी चीनी फैक्टरी उभर कर आती है, चाहे चीनी कारखाना किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध हो, उसके प्रति निर्णय लेते समय अपेक्षा की जाती थी कि राजनीतिक ईर्ष्या का चष्मा उतार कर रखे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.