आतंकवादियों का हमला, न्यायालय का फैसला : मंदिर वही बनाएंगे – ५

ram mandir ayodhya

अयोध्या में का विवादित ढाँचा जमीनदोस्त होने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh), बजरंग दल (Bajrang Dal) और विश्व हिंदू परिषद पर (Vishwa Hindu Parishad) केंद्र सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। वह न्यायालय में टिक न सका। ६ दिसंबर १९९२ के बाद श्री राम मंदिर के संदर्भ में घटित कुछ महत्त्व की घटनाओं पर नज़र डालतें हैं।

११ मई १९९८ को बाबरी मस्जिद मुव्हमेंट समन्वय समिति के संयोजक सैयद शहाबुद्दीन ने निवेदन जारी किया कि, विवादित स्थल पर राम मंदिर बनता है तो उस पर आक्षेप नहीं होगा। २१ मई १९९८ को लखनऊ उच्च न्यायालय के खंडपीठ ने सीबीआय न्यायालय के विशेष न्यायाधीश जे. पी. श्रीवास्तव को आदेश दिया कि, ६ दिसंबर की घटना में के आरोपियों पर अगस्त में आरोप निश्चित करें।

विशेष न्यायालय ने लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत ४९ लोगों पर आरोप निश्चित किये। १० जून १९९८ को रा. स्व. संघ के तत्कालीन संघचालक प्रा. राजेन्द्रसिंह जी ने स्पष्ट किया कि, अयोध्या के मामले में किसी के साथ संघर्ष करने की संघ की भूमिका नहीं है। लेकिन, राम मंदिर वही बने ऐसा संघ का स्पष्ट मत हैं। ६ जुलाई १९९८ को केंद्रीय निर्देशक मंडल ने सरकार से माँग की कि, मंदिर की जगह श्री राम जन्म भूमि न्यास को सौपी जाय। ३ दिसंबर १९९८ को अयोध्या में के विवादित स्थल पर रोज की पूजा के आलावा अन्य कार्यकमों पर उत्तर प्रदेश प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया। १ फरवरी १९९९ को अयोध्या के दिगंबर अखाड़े में आयोजित संत सम्मेलन में श्री राम जन्म भूमि स्थल पर ही भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प किया गया।

तीन प्रस्ताव पारित किये गए। ४ जून १९९९ को लखनऊ के विशेष न्यायालय ने लालकृष्ण अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और बाळासाहेब ठाकरे इन नेताओं के साथ ४८ लोगों को न्यायालय में उपस्थित रहने का आदेश दिया। ७ दिसंबर १९९९ को प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी ने गृहमंत्री लालकृष्ण अडवाणी के साथ मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती के मंत्रिपद के त्यागपत्र स्वीकार किये। इन तीनों ने प्रधानमंत्री को त्यागपत्र सौपे थें। २१ जून २००० को लिब्राहन आयोग ने विवादित ढाँचा गिराने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मुख्यतः जिम्मेदार माना था। उन्हें २० जुलाई को आयोग के सामने बुलाया गया। १७ जुलाई को अयोध्या के मामले में विशेष न्यायाधीश एस. के. शुक्ल ने सब आरोपियों को न्यायालय में उपस्थित रहने का आदेश दिया। कल्याण सिंह के उपस्थित रहने के लिए जमानती वॉरंट निकाला गया। प्रलंबित मामलों के स्थानांतरण के लिए कल्याण सिंह ने ३ ॲाक्टोबर २००० को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की।

अयोध्या में गिराई गई मस्जिद फिर बनाई जाय, ऐसी माँग बाबरी मस्जिद कृति समितिने ९ नवंबर २००० को की। ३ दिसंबर को उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया की, सरकार विवादित स्थल पर कोई भी निर्माण कार्य करने का निर्णय नहीं ले सकती। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी बाजपेयी ने ३ दिसंबर २००० को कहा कि, अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय भावना का प्रकटीकरण होगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण ने स्पष्ट किया कि, बाबरी के पतन के लिए भाजपा ने माफ़ी मांगने का प्रश्न ही नहीं हैं।

मार्च २००३ से राम मंदिर के लिए देश व्यापी सत्यागह किया गया। दिल्ली के गांधी मार्केट मैदान पर २७ मार्च से २ अप्रेल तक हुए इस सत्यागह में हजारों राम भक्तों ने भाग लिया।

५ जुलाई २००५ को सुबह ९ बजे अयोध्या के श्री राम जन्म भूमि के आहाते में पाँच आतंकवादी घुसे। सुरक्षा दलों के जवानों ने उन्हें मार गिराया। इसमें नागरिकों ने भी अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। आतंकियों के पास से बड़ी मात्रा में शस्त्रास्त जप्त किये गए।

२०१४ में राम भक्त नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद राम मंदिर का प्रश्न हल होगा ऐसा विश्वास करोड़ों राम भक्तों के मन में निर्माण हुआ। प्रश्न था कि संसद कानून बनाकर राम मंदिर बनाए या इससे संबंधित सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे मुकद्दमे का फैसला मान्य करें। मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का सम्मान करने की भूमिका स्वीकार की।

९ नवंबर २०१९ को सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला आया और राम मंदिर के निर्माण का मार्ग साफ़ हुआ। पूरे देश की निगाहें इस फैसले पर टिकी थीं। अयोध्या में का विवादित स्थल राम मंदिर निर्माण के लिए देने का फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने दिया। मस्जिद बनाने के लिए मुसलमानों को अन्यत्र जगह दी जाय, ऐसा भी आदेश में स्पष्ट कहा गया। ६ दिसंबर १९९२ को बाबरी ढाँचा गिराना असंवैधानिक, गैरकानूनी था; ऐसा मत भी न्यायालय ने व्यक्त किया। इस प्रकार करोड़ों हिन्दुओं की भावना का आदर करनेवाला, भारत के इतहास में सबसे महत्त्व का फैसला सर्वोच्च न्यायालय ने दिया।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने घोषित किया था की अयोध्या में शीघ्र ही भव्य राम मंदिर का निर्माण आरंभ किया जाएगा। समस्त हिन्दुओं की श्रद्धा – भावना के प्रतीक प्रभु राम के भव्य मंदिर का पूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों होगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि होंगे। कोरोना के संकटकाल में मर्यादित संख्या में ही मान्यवरों को निमंत्रित किया गया हैं। लेकिन, यह कार्यक्रम टीव्ही पर दुनिया भर में देखा जा सकेगा।

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