राज्य में बाढ़ की स्थिति पर काबू पाने स्थाई पुनर्वास रूपरेखा बनेगी- मुख्यमंत्री

विश्व बैंक, एडीबी बैंक के प्रतिनिधियों के साथ बाढ़ की स्थिति के उपरांत महत्वपूर्ण बैठक

मुंबई:  विश्व बैंक तथा एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के सहयोग से सांगली एवं कोल्हापुर जिलों में बाढ़ की स्थिति पर कारगर उपाय ढूंढने हेतु स्थाई पुनर्वास रूपरेखा तैयार करने सरकार हर संभव प्रयास कर रही है. यह जानकारी आज यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी. उन्होंने बताया कि बाढ़ की स्थिति को लेकर इकट्ठा हुए पानी को सूखे की परिस्थिति वाले क्षेत्रों में मोड़ने के लिए योजना बनाई जा सकती है. इसके कारण यह प्रारूप अन्य सभी के लिए रोल मॉडल सिद्ध होंगी. ऐसा विश्वास भी उन्होंने व्यक्त किया.

कोल्हापुर तथा सांगली जिलों में निर्माण हुई बाढ़ की स्थिति का वैश्विक बैंक तथा एडीबी बैंक के दस्ते ने हाल ही में जायजा लिया. इस दस्ते के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री के आवास वर्षा पर श्री फडणवीस की अध्यक्षता में बैठक संपन्न हुई. मुख्य सचिव अजोय मेहता, मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त तथा कोल्हापुर सांगली जिला के विशेष पुनर्वास अधिकारी प्रवीण परदेसी, जलसंपदा विभाग के प्रधान सचिव आए आई एस चहेल, ऊर्जा विभाग के सचिव अरविंद सिंह, महावितरण के संजीव कुमार, पुनर्वास तथा राहत विभाग के सचिव किशोर राजे निंबालकर, आपदा प्रबंधन कक्ष के संचालक अभय यावलकर, संबंधित अधिकारी तथा दोनों बैंकों के प्रतिनिधि मंडल के सदस्य अनूप कारनाथ, दीपक सिंह, सौरभ दानी, अशोक श्रीवास्तव, चंद्रशेखर सिं,ह सौरभ शाह आदि उपस्थित थे.

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि महाराष्ट्र में एक ओर तीव्र सूखे की स्थिति है जबकि दूसरे संभागों में अधिक वर्षा के कारण बाढ़ की परिस्थिति कठिन बनी हुई है. उन्होंने कहा कि हाल ही में महाबलेश्वर में विश्व की सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई है. जबकि इसी जिले से 60 से 70 किलोमीटर की दूरी पर क्षेत्र में पीने के पानी की भी कमी थी. मौसम के इस प्रकार बदलने के कारण आपदा प्रबंधन तथा पुनर्वास को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण से विचार-विमर्श करने का समय आ गया है. इस को दूर करने के लिए व्यापक एवं स्थाई उपाय करने आवश्यक है. विश्व बैंक तथा एशियन डेवलपमेंट बैंक के पास आपदा प्रबंधन को लेकर विश्व भर के अनेक ठिकानों का अनुभव होने के कारण उनके सहयोग से महाराष्ट्र में आपदा के लिए व्यापक और स्थाई पुनर्वास रूपरेखा तैयार की जाएगी.

इस रूपरेखा में मूलभूत सुविधाएं, कृषि, आर्थिक और अन्य विषयों का समावेश होगा. एक ओर सूखा होता है तो दूसरी और बाढ़ की स्थिति. इसमें अचानक इकट्ठा होने वाले बाढ़ के पानी को सूखाग्रस्त भागों की दिशा मे मोड़ने की आवश्यकता है. इस प्रकार के व्यापक ‘ब्लूप्रिंट’ को तैयार करने पर यह देश के अन्य राज्यों सहित समूचे विश्व के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण और ‘रोल मॉडल’ सिद्ध होगा. राज्य सरकार इसके लिए हर संभव प्रयास करेगी. बैंकों के साथ समन्वय के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की जाएगी.

विशेष पुनर्वास अधिकारी श्री परदेसी ने सांगली तथा कोल्हापुर जिलों में बाढ़ की स्थिति से हुए नुकसान और किए गए उपायों को लेकर विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया. शिवाजी विश्वविद्यालय ने बाढ़ की स्थिति पर अध्ययन कर उसकी विश्लेषणात्मक रपट और निष्कर्ष सरकार को सौंपी है. इस अवसर पर हुई चर्चा में बैंकों के प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों ने राज्य सरकार के आपदा प्रबंधन तथा आपदा परिस्थिति कक्ष की ओर से शीघ्रता के साथ किये परिणामकारक उपायों की सराहना की तथा इन प्रतिनिधियों का गौरव किया गया.