शिवसेना चली बिहार, लेकिन धनुष्यबाण …

Sanjay Raut - JD (U) - Shiv Sena

पटना : आखिरकार शिवसेनाने (Shiv Sena) बिहार (Bihar) विधानसभा चुनावों में उतरने का फैसला ले लिया है। आज, पार्टी के नेता संजय राउत इन्होने पत्रकारोंसे बोलते हुए इस बात ने पुष्टि की। लेकिन शिवसेना के सामने बड़ी समस्या खड़ी हुई है। शिवसेना चुनाव तो लढ सकती हैं पर अपने धनुष्यबाण चिन्ह पर नहीं। क्योंकि, जनता दल इकाई ने इसपर एतराज जताया हैं। जनता दाल के के चिन्ह पर धनुष्यबाण रहने के वजहसे उन्होंने इसपर आपत्ति जताई है। इसवजह से शिवसेना धनुष्यबाण के बगैर चुनाव लड़ने वाली है.

शिवसेना बिहार में 30 से 40 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है। 2015 के चुनावों में, पार्टी ने 80 सीटों पर चुनाव लड़ा था और एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। सभी उम्मीदवारों को केवल 2 लाख 11 हजार वोट मिले। इस समय पार्टी के उम्मीदवार तय करना सांसद अनिल देसाई की जिम्मेदारी है। पता चला है कि इसे प्रियंका चतुर्वेदी और सांसद संजय राउत को सौंपा गया हैं। पिछले साल के लोकसभा चुनावों से पहले, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर ने मुंबई का दौरा किया था और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) के साथ चर्चा की थी। उस समय कहा गया था कि प्रशांत किशोर का मानना है कि शिवसेना को भाजपा (BJP) के साथ सीटों के लिए लड़ना चाहिए और जितनी संभव हो उतनी सीटें मिलनी चाहिए ताकि यदि भाजपा को कल तक लगभग 200 सीटें मिल जाती हैं, तो अन्य सहयोगी दल नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर प्रधानमंत्री बनने का दबाव बनाएंगे। हालांकि, मोदी के नेतृत्व में, भाजपा ने अकेले 300 से अधिक सीटें जीतीं और एनडीए में अपने सहयोगियों की इच्छाओं पर पानी फेर दिया।

वर्तमान में, शिवसेना का मुख्य फोकस भाजपा है। शिवसेना के बिहार चुनाव में भाजपा के वोटों को कम करने के लिए कुछ उम्मीदवारों को इस तरह से मैदान में उतारने की संभावना है। यह भी कहा जाता है कि सुशांत सिंह राजपूत मामले को लेकर शिवसेना को लेकर बिहारी मतदाताओं में संदेह का माहौल है। इसलिए, बिहार में बीजेपी को शिवसेना द्वारा नुकसान होने की संभावना नहीं है।

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