हिंदी नहीं जानने वाले अधिकारियों की मंत्रालय अब लेगा क्लास

नई दिल्ली : हिंदी नहीं जानने वाले अधिकारियों को अब मंत्रालय ने हिंदी सिखाने की योजना बनाई हैं। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अधिकारी आधिकारिक कामकाज में 100 फीसदी हिन्दी के प्रयोग का लक्ष्य भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। मंत्रालय की सूचना के अनुसार 15 जून को मंत्रालय की ‘आधिकारिक भाषा कार्यान्वयन समिति’ की एक बैठक हुई थी, जिसमें बताया गया था कि मंत्रालय के सभी काम हिंदी में होने चाहिए। सूत्रों के मुताबिक मंत्रालय के कई विभागों में हिंदी में पत्राचार, नोट लेने अथवा टिप्पणियों का प्रतिशत बेहद कम है। साथ ही मंत्रालय में हिन्दी जानने वाले 20 स्टेनोग्राफर्स को उन अधिकारियों के साथ लगाया जाए, जो हिन्दी का प्रयोग करना चाहते हैं। मंत्रालय के सभी आधिकारिक संचार और पत्राचार हिन्दी में होने चाहिए, लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। मंत्रालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि पूरा कामकाज हिन्दी ही हो।

ग्रामीण विकास मंत्रालय पर केंद्र सरकार की कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं जिसमें मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, ग्राम स्वराज अभियान और ग्रामीण आजीविका जैसी कई योजनाओं की जिम्मेदारी है, जो सीधे देश के ग्रामीण इलाकों से जुड़ी हुई हैं। मंत्रालय में इतना जबरदस्त दबाव है कि हिन्दी ना जानने वाले अधिकारियों को हिन्दी सीखने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने के लिए बोल दिया गया है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए पुस्तकालयों से हिन्दी किताबों की खरीद करने के लिए भी बोला जा चुका है। यह आदेश मई 2015 को एनडीए सरकार ने जारी किया था, जिसमें आधिकारिक भाषा अधिनियम, 1963 के अनुसार सभी सरकारी दस्तावेज हिंदी और अंग्रेजी में द्विभाषिक रूप से जारी किए जाने की बात थी। वहीं फरवरी 2015 में भी सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ‘हिंदी के प्रगतिशील उपयोग को सुनिश्चित करने’ के लिए हिंदी सलाहकार समिति का गठन भी किया था। साथ ही गृह मंत्रालय ने पहले ही सभी नौकरशाहों को सोशल मीडिया पर बने मंत्रालयों के आधिकारिक अकाउंट्स पर अंग्रेजी की जगह हिंदी को प्राथमिकता देने का निर्देश जारी किये है।