पढों, समृद्धी महामार्ग में ___ लातूर- नांदेड कनेक्शन और …

EknathShinde

‘राज्य मार्ग विकास महामंडल’ मतलब एमएसआरडीसी का कार्यालय सी-लिंक से बांद्रे की और उतरते समय बाई और है। समय हो तो जागरूक व्यक्ति ने इसे भेट देनी चाहिए। ऐसी चर्चा है कि यहाँ समृद्धी महामार्ग के काम के कॉन्ट्रॅक्ट के संदर्भ में ‘अर्थपूर्ण’ हलचले चल रही हैं।

इस कार्यालय में दो ‘खाऊबाबा’ बैठें हैं। एक नांदेड़ से है और दूसरे का कनेक्शन है लातूर से। फिलहाल ये दोनों ही “मिल बाँटकर खाएगें” कार्यक्रम के अंतर्गत स्वयं की समृद्धि कर रहें हैं। ये खाऊबाबा सार्वजनिक रूप में कहते हैं – हम पर २०१९ के लोकसभा चुनाव के लिए पैसों का जुगाड़ करने की जुम्मेदारी सौंपी गई है; उसे पूरा करने के लिए यह सब करना ही पड़ता है! ये ६ मतदार संघ कौनसे हैं ? वे दोनों किस पार्टी के संदर्भ में बात करते हैं इसकी जानकारी नहीं मिल पाई।

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इस कार्यालय में कॉन्ट्रॅक्टर्स और उनके पंटर की टोलियाँ खड़ी दीखती हैं। एक – एक को भीतर बुलाकर बात की जाती है। ‘बँटवारा’ होता है। महाराष्ट्र में जिस शहर को ‘विद्या की नगरी’ कहा जाता है उस शहर में का एक नेता इस केंद्र में है उसके पीए पाटिल का मुकाम फिलहाल एमएसआरडीसी के इस कार्यालय में ही है। एमएसआरडीसी के राज्यमंत्री के पीए भागवत का भी इस कार्यालय में मुक्त संचार है। वे नांदेड़ और लातुरवासीयों के केबिन में पड़े रहते हैं। ५ उंगलियों में ६ अंगुठियां पहननेवालों का इस कार्यालय में बोलबाला है।

समृद्धी महामार्ग के अलग – अलग टप्पे बनाकर वह काम १३ – १४ बड़ी कंपनियों दिए गए हैं। विशिष्ट किलोमीटर तक का काम विशिष्ट कंपनी को दिया गया है। एक – एक कंपनी ने दो से साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों तक के काम लिए हैं। ऐसे बड़े कॉन्ट्रॅक्ट में बड़ी कम्पनियाँ कॉन्ट्रॅक्ट लेती हैं और अन्य कम्पनियों को सबलेट करती हैं। अब तक सार्वजनिक निर्माण विभाग या एमएसआरडीसी द्वारा जो काम होते थें उनमें राज्य शासन, एमएसआरडीसी/ सार्वजनिक निर्माण विभाग और संबंधित कंपनी के बीच अनुबंध होता था। फिर मूल कंपनी उसके काम सबलेट करती थी। कई बार मुख्य कंपनी ही सबलेट कंपनी को पैसे दें में अड़ंगे निर्माण करती या उसे ठगती थी। इस विवाद में कई बार प्रकल्प का काम खींचता जाता था।

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इससे निपटने का कारण देते हुए एमएसआरडीसी, मुख्य कंपनी और सबलेट कंपनी इन तीनों के बीच अनुबंध करने की पद्धति समृद्धी महामार्ग में ( लातूर- नांदेड कनेक्शन) ने लाई है। इस कारण सबलेट कंपनियों को उनका पैसा डुबेंगा नहीं इसकी गारंटी मिलने से छोटे – बड़े कॉन्ट्रॅक्टर्स ‘ समृद्धी’ में काम पाने के लिए हाथ – पैंर मार हैं। ऐसे कॉन्ट्रॅक्टर्स की फिलहाल समृद्धी के कार्यालय में अच्छी खांसी भीड़ उमड़ी हैं और इस भीड़ ने वहाँ ‘ अर्थपूर्ण ‘ हलचलों को गति प्रदान की हैं।

एमएसआरडीसी के कॅबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे को इन ‘ अर्थपूर्ण ‘ हलचलों की कल्पना नहीं होगी ? उनकी पीठ पीछे सब खुलेआम चल रहा है। शिंदे साहेब, ठाणे की शिवसेना पर आपकी जैसी धाक है; एक सक्षम नेता होने के नाते वैसी धाक आप एमएसआरटीसी में भी जमाए ऐसी आप से अपेक्षा है। अन्यथा माल कोई दूसरा खाएगा और बदनाम आप होंगे। आपकी स्वच्छ प्रतिमा पर दाग ना लगे, ऐसा हम दिल से चाहते हैं। कल अगर मातोश्री ने पूंछा कि, तुम्हारे विभाग में यह क्या चल रहा है? तो क्या आप ‘मुझे कुछ पता नहीं’ ऐसा उत्तर दे सकेंगे ? फिर बताओ; जो कुछ कल रहा है उसकी जानकारी आपको हैं फिर भी आप अनदेखी कर रहे हो ?