विश्व योग दिन मनाने पर भी सियासत !

विश्व योग दिन मनाने पर भी सियासत !

संयुक्त राष्ट्र संघने २१ जून को ‘विश्व योग दिन’ मनाने की घोषणा की । उसके बाद संपूर्ण विश्व पर योग तथा भारत छा गया। योग यह भारत ने विश्व को दी देन हैं। शरीर एवं मन के स्वास्थ्य के लिए योग का महत्त्व दुनिया ने मान्य किया हैं। सब भारतीयों को इसका अभिमान हैं। स्वयं प्रधनमंत्री योग का ‘ब्रँडिंग’ करते हैं।

इस कारण गत कुछ दिनों में बच्चों से वृद्धों तक, सब योग की ओर आकर्षित हो रहें हैं। योगासन और प्राणायाम यह मोदी का ‘फिटनेस फंडा’ हैं। ६५ वर्षं आयु होने के बाद भी वे तेज-तर्रार हैं। इस कारण मोदी ने जब योग, प्राणायाम व्यायाम का महत्त्व बताया तो देशवासियों ने उनका अनुकरण किया। सारा विश्व रविवार को जब योग दिन मना रहा था तब महाराष्ट्र सरकार ने उससे दुरी बनाए रखी। पहले राज्यपाल की कटु आलोचना करने के बाद उनको झुककर सलाम कर शीर्षासन करनेवाले सांसद योगासन करते दिखाई नहीं दिए। महाविकास आघाडी सरकार का कोई मंत्री कही भी विश्व योग दिवस कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिया। अंतरराष्ट्रीय योग दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कारण मनाया जा रहा हैं।

इस कारण, इस कार्यक्रम में शामिल होना मोदी का अनुकरण करना होगा इस भावना से शायद राज्य सरकार ने योग दिन के कार्यक्रम में हिस्सा ही नहीं लिया ! योगासन व्यक्तिगत आरोग्य सही रखने का शास्त्र हैं। समाज का आरोग्य सुदृढ़ रखने में भी योग का बडा महत्त्व हैं। इस कारण सामाजिक दायित्व का ध्यान रखकर राज्य सरकार व्यापक स्तर पर विश्व योग दिन कार्यक्रम आयोजित करें ऐसी योगप्रेमियों की अपेक्षा थीं; लेकिन महाआघाडी सरकार ने वहाँ भी सियासत को ही महत्त्व दिया। कोरोना के संकट की घडी और लॉकडाऊन के कारण समाज में निर्माण हुई अस्वस्थता के दौर में समाज को निराशा से बाहर निकालने के लिए योगासन महत्त्वपूर्ण सिद्ध हो सकते हैं; यह ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने योग दिन के कार्यक्रमों का व्यापक आयोजन करना अपेक्षित था। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार के योग दिन में जो संदेश दिया उसका मर्म समझना चाहिए।

उन्होंने कहा था – कोरोना श्वसन यंत्रणा पर हमला करता हैं। प्राणायाम श्वसन यंत्रणा को मजबूत करने का काम करता हैं। रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ाता है। इस कारण कोरोना को हराने के लिए योग और प्राणायाम की मदद होती हैं। मानसिक तनाव दूर होकर संयम और सहनशक्ती बढ़ती हैं। योग के जानकार मानते हैं की राष्ट्रवादी और काँग्रेस के नेतृत्व में समाज के सामने योग दिन का महत्त्व प्रस्तुत करने की अपेक्षा रखना गलत है।

शायद उन्हें इसमें भी हिन्दुत्व आदि दिखाई देता हैं। ऐसा मान भी ले तो भी शिवसेना को इसमें क्या दिक्कत है ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई वर्षों से नियमित योगासन करते हैं। उनकी प्रचंड कार्यक्षमता का मुख्य कारण योग्य हैं। योग और प्राणायाम से शारीरिक एवं मानसिक विकारों पर नियंत्रण हासिल किया जा सकता हैं यह सिद्ध हो चुका हैं। भाजपा शिवसेना सरकार के समय योग दिन का उत्सव मनाया जाता था। लाखों छोटे – बड़े इसमें भाग लेते थें। मंत्रालय से गडचिरोली तक सरकारी कर्मचारी योगासन करते थें। हर शाला में कार्यक्रम होते थें। लॉकडाऊन के कारण इस वर्ष योग दिन को उत्सव का स्वरूप देना संभव नहीं था। फिर भी, योग दिन का ऑनलाईल उत्सव तो मनाया ही जा सकता था।

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