नए साल-क्रिसमस पर शोर-शराबा नागरिकों को पुलिस स्टेशन भेज देगा

मुंबई : इस वर्ष यदि नागरिकों ने क्रिसमस व नव वर्ष पर शोर-शराबा किया तो उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और पुलिस-कचहरी के चक्कर काटने पड़ सकते हैं. क्योंकि महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश पर ध्वनि प्रदूषण को मापने वाले मीटर खरीद लिए हैं और सभी पुलिस स्टेशन में बांट भी दिए हैं, ताकि ध्वनि प्रदूषण का स्तर मापा जा सके.

इन मीटर की सहायता से क्रिसमस और नए साल पर कोई भी नागरिक ध्वनि प्रदूषण नियमों का उल्लंघन नहीं करेगा तो सजा भुगतेगा.

हाईकोर्ट के के आदेश का पालन नहीं होने पर जज एएस ओक और जज अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ ने पूर्व मुख्य सचिव (गृह) केपी बख्सी को पिछले सप्ताह कोर्ट की अवमानना की जो सजा शुक्रवार को सुनाने वाले थे. लेकिन कोर्ट को सरकार से यह जानकारी मिलने पर कोर्ट ने सजा नहीं दी.

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह कोर्ट ने इन संयंत्रों को न खरीदने के लिए दिए गए कोर्ट के आदेश को न मानने के लिए बख्सी को दोषी मानते हुए अगली सुनवाई में सजा सुनाने को कहा था.

डेसीबल मीटर सरकार द्वारा खरीदे जाने थे और सभी पुलिस स्टेशनों को सप्लाई किए जाने थे ताकि पुलिसकर्मी किसी भी पर्व, जुलूस, मोर्चा, त्योहार आदि पर होने वाले ध्वनि प्रदूषण को माप सकें और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कर सकें. इस कसरत का उद्देश्य ध्वनि प्रदूषण नियमों और विनियमनों का पालन कराना है.

Also Read: ध्वनि प्रदुषण नियम तोड़ोगे तो पड़ेंगे डंडे

वरिष्ठ वकील आशुतोष ने सरकार की ओर से कोर्ट में कहा कि मीटर बांटने के साथ संबंधित पुलिस अधिकारियों को इन मीटर को चलाने की ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है. सरकार ने कोर्ट को यह भी आश्वासन दिया है कि 25 और 31 दिसंबर को ध्वनि प्रदूषण मानकों का पालन किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस आशय की एक रिपोर्ट कोर्ट को अगली सुनवाई में पेश की जाएगी और यदि कोर्ट इस पालन रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हुई तो वह अपनी ओर से सजा दे सकता है. ‘हम कोर्ट से रहम करने की कोई अपील नहीं करेंगे’। अब इस मामले पर सुनवाई 24 जनवरी को होगी.

ध्वनि प्रदूषण पर अनेक जनहित याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई हैं. गौरतलब है कि पिछले कुछ सालों में ध्वनि प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता गया है, जिससे अनेक नागरिकों को अनेक बीमारियां हो गई हैं. इन याचिकाओं में इस प्रदूषण को रोकने की अपील कोर्ट से की गई थी.