मेळघाट : आदिवासीयों और वनविभाग के बीच संघर्ष तीव्र

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चिखलदरा/धारणी (अमरावती) :-मेळघाट में टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में बुधवार को गोलीबारी के बाद आदिवासियों और वनविभाग अधिकारीयों में संघर्ष और तीव्र हो गया है। बुधवार को वनविभाग अधिकारीयों द्वारा गोलबारी और हमले में २५ से ३० आदिवासी गंभीर रूप घायल हो गए थे जिन्हे बाद में अमोना के अस्पताल में भर्ती कराया गया।

२० से अधिक आदिवासी लोग, बच्चे, महिलाएं और बूढ़े लापता है। उनकी जानकारी अब तक नहीं मिली है। लापता लोगों में रामम दादू कासडेकर, उनकी पत्नी और एक साल का लड़का, बलराम शंकर बेठेकर,पत्नी और बेटा, मोती सानू कासडेकर, धारगढ़ के बापूराव मंसू सांवलकर, सुरेंद्र हीरालाल कासडेकर, हीरा मावस्कर, हीरा खुरति कासदेकर, तेलनदास तड़के शामिल हैं। इस बीच, घायल चंपालाल बेठेकर को अमोना कसोद लाया गया।

दरअसल, तेलपानी सहित आठ पुनर्वसित गांवो के आदिवासियों ने एक हफ्ते पहले जंगल में डेरा जमाया था। जिन्हे जंगल से निकलने के लिए अधिकारियो ने प्रयत्न किए। पुनर्वसन के बारें में बात करने के लिए मुख्यमंत्री ने मेळघाट के विधायक राजकुमार पटेल को गांव में भेजा था। पटेल के साथ उपविभागीय अधिकारी और पुलिस के साथ मिलकर अमोना कसोद गांव के आदिवासियों से चर्चा की लेकिन इसका कोई भी हल नहीं निकला।

बुधवार को शाम लगभग ४ बजे, प्रभागीय फ़ॉरेस्ट गार्ड के नेतृत्व में टीम ने तेलपानी में आदिवासियों को जंगल से बाहर निकालने की कोशिश की। आदिवासियों के नहीं मानने पर गोलीबारी की गई इसमें चंपालाल बेवु बेठेकर सहित कुछ आदिवासी घायल हो गए। घायल चंपालाल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वन अधिकारी आदिवासियों को मजबूर कर रहे हैं। आदिवासियों द्वारा बसाए गए जंगलों में आग लगा दी गई थी और साहित्य को नष्ट कर दिया गया था। आदिवासी युवाओं के पास ३० बाइकें जब्त की गईं।

सुरक्षा के तौर पर पुलिस बंदोबस्त को बढ़ाया गया है। साथ ही चिखलदरा तालुका के तेलपानी के आदिवासी गांव के नागरिको का अकोट तालुका में पुनर्वसन किया गया। हालांकि इसका कोई भी मतलब नहीं है क्योंकि आदिवासी को किसी प्रकार का मुआवजा और पूर्ण वित्तीय सहायता नहीं मिली है। इससे केवल असंतोष ही पैदा हुआ है।