कमिश्नर जायस्वाल के राज में आदिवासी बेहाल, बिल्डर मालामाल

ठाणे : विवादास्पद ठाणे के मनपा आयुक्त संजीव जायस्वाल पर औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिगृहीत सरकारी भूमि और आदिवासियों की भूमि का उपयोग बदल कर बिल्डरों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया जा रहा है. साथ ही यह भी आरोप है कि ऐसा कर वे सरकारी खजाने को करोड़ों के राजस्व का चूना लगा रहे हैं.

जायस्वाल द्वारा हाल ही में ठाणे में जो अनेक अवैध निर्माण ढहाने की मुहिम चलाई और कार्य में बाधा पहुंचाने वाले स्थानीय भाजपा विधायक के कार्यकर्ताओं को निजी सुरक्षा गार्डों से पिटवाया, उसका भी कड़ी आलोचना की जा रही है.

अब राष्ट्रवादी कांग्रेस और पीडब्ल्यूपी औद्योगिक उपयोग के लिए अधिगृहीत सरकारी भूमि को आवासीय योजना कि लिए हस्तांतरित करने पर मनपा आयुक्त आईएएस अधिकारी जायस्वाल के खून के प्यासे हो उठे हैं.

विधान मंडल का हाल ही में नागपुर में संपन्न शीतकालीन अधिवेशन में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने विधान परिषद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत आदिवासियों से औद्योगिक उपयोग के लिए अधिगृहीत भूमि को भी अन्य भूखंडों के साथ ठाणे मनपा द्वारा आवासीय प्रकल्प के लिए बदले जाने का मामला काफी जोरशोर से उठाया था.

विपक्ष के विरोध के आगे हथियार डालते हुए राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने सदन में कार्यस्थल पर 15 दिनों के स्थगन लगाते हुए जांच दल गठित करने की घोषणा कर दी थी.

ठाणे मनपा आयुक्त जायस्वाल के कथित अवैध कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए मुंडे ने यह भी आरोप लगाया था कि आदिवासियों से औद्योगिक उपयोग के लिए अधिगृहीत भूमि को मे. ओरिएंटल इंडस्ट्रीज से लेकर आवासीय उद्देश्य के लिए एक डेवलपर को हस्तांतरित कर दिया गया. उन्होंने मांग की थी कि मनपा आयुक्त की इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए.

सदन में मुंडे का समर्थन पीडब्ल्यूपी के वरिष्ठ सदस्य जयंत पाटिल और राष्ट्रवादी के निरंजन डावखड़े ने किया और उच्चतम न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आदिवासियों की जमीन हस्तांतरित नहीं की जा सकती. उन्होंने भी मनपा आयुक्त के आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी.

उन्होंने आदिवासियों की जमीन उनके मूल मालिकों को वापस लौटने की भी मांग की थी. भूमि अभिलेख से आदिवासियों के नाम हटाने को गंभीर मामला बताते हुए उन्होंने ठाणे के संबंधित राजस्व अधिकारी अपर आयुक्त आर.जे. शिंदे पर भी कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है.

मुंडे ने मामले को गंभीर बताते हुए सभी संबंधित लोगों की बैठक 10 दिनों में बुलाने और विवादास्पद आदेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी.

पुनरीक्षण को सही ठहराते हुए आवासीय प्रकल्प रोक की मांग से साथ विपक्ष के नेता मुंडे ने यह भी बताया कि अभी तक निर्णय पर अभी भी रोक नहीं लगाई गई है. मुंबई के वरली स्थित आवासीय परिसर कैम्पा कोला कम्पाउंड के साथ भी एक अलग विवाद है.

राजस्व मंत्री ने संबंधित आवासीय प्रकल्प पर रोक लगाते हुए माना कि आदिवासियों की जमीन निजी कंपनी के हस्तांतरित नहीं की जा सकती.

चंद्रकांत पाटिल ने सदन को आश्वस्त किया था कि सरकार मामले की जांच सभी पहलुओं से करेगी और यदि इसमें कोई अनियमितता मिली तो काम पर रोक लगा दी जाएगी.

आश्चर्य की बात यह है कि जब विपक्षी नेता सदन में ध्यानाकर्षण नोटिस दे चुके थे, उस वक्त ठाणे मनपा के “हठी” अधिकारी “बदले” की कार्रवाई करते हुए गरीब आदिवासियों के घरों पर बुलडोजर चलवा रहे थे. यह मामला भी सदस्यों ने चर्चा के दौरान सदन में उठाई.