मरकज के सामने केजरीवाल पॅटर्न का करारा जवाब

Arvind Kejriwal - Markaz

नई दिल्ली : कोरोना से मुकाबला करनेवाले देश दो मुख्यमंत्रीयोंकी कही तारीफ कि जा रही है. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और दुसरे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. पहले मुख्यमंत्री जो कि कट्टर कम्युनिस्ट हैं, तो दुसरे आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा. केरल पॅटर्न आपणे इसके पूर्व ‘महाराष्ट्र टुडे’ में पढा है. केजरीवाल इन्होने लिये हुए निर्णयोंकी अगर खासियत देखा जाये तो, वह मीडिया क्या कहेंगी, सोशल मीडिया पर किस तरह का तंज कसा जायेगा इसकी चिंता न करते हुए अपने निर्णय पर अडिग रहना.

दिल्ली के जनता से उनका काफी अच्छा सबंध जुड़ा हुआ हैं. इसलिए कुछ महीने पूर्व हुए चुनाव में बड़े बहुमत से सत्ता की चाबी उनको जनताने सौपी. दिल्ली के जनताने दिखाया हुवा ये विश्वास आज कोरोना के संकट समय वो सार्थ कर रहे है. जो मरकज की चर्चा देशभर चली वह दिल्ली में ही स्थित है. जा की कोरोना बॉम्ब के स्वरूप में उभर कर सामने आया. लेकिन तबलिगी की और से प्रादुर्भाव रोकने के लिए या फिर वही के वही रोका जाये इसलिए केजरीवाल इन्होने अपनी पूरी यंत्रणा काम पर लगा दी.

मुंबई स्थित धारावी समान तंग बस्तिया दिल्ली में भी है. केजरीवाल सरकारने समय न गवाते हुए इन बस्तियों में उपाययोजना शुरू की. केजरीवाल इन्होने लिए हुए निर्णयोंकी तुलना किसी और राज्यों से करना ठीक नहीं. अगर तुलना की जाये तो यह राजकारण हो रहा हैं, ऐसे आरोप लगाया जाएंगे. लेकिन इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता की, जो कार्य दूसरे राज्यों ने देरी से शुरू किये, वह केजरीवाल इन्होने खूप पहले शुरू कर दिए थे. कॅबिनेट मंत्री, सरकार के ज्येष्ठ अधिकारी, दिल्ली महापालिका के अधिकारी और पुलिस अधिकारी इनका टास्क फोर्स उन्होंने 4 मार्च को स्थापित किया. 5 मार्च को दिल्ली स्थित प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल, महाविद्यालय और दूसरे शिक्षण संस्थाओंको बंद किये गए.

8 मार्च को कोरोना ये महामारी घोषित हुई और सर्व धार्मिक, सांस्कृतिक और राजकीय कार्यक्रमों पर पाबंदी लाई गई. 13 मार्च को बड़ी क्रीडा स्पर्धाएं जैसे की आयपीएल वगैरे रद्द किये गए. साथही नाईट क्लब, जिम आणि स्पा बंद किये गए. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन्होने 5 प्रख्यात डॉक्टरोंका एक पॅनल तयार किया है. दिल्ली में रोज 1000 मरीज भी दाखल होते हैं इसके बावजूद परिस्थिती को कैसे नियंत्रण में रखा जाये इसका पूरा अहवाल इस टीमने मुख्यमंत्री केजरीवाल को दिया.

इसके तुरंतबाद दिल्ली में उपाययोजना की गई. दिल्ली की 500 स्कुले नाईट शिफ्ट में शुरू कर दी गई. उन स्कुलों में करीब 60000 लोंग रहने की व्यवस्था थी. वहां पर 11 हजार लोगोंको शुरूवातसेही रखा गया था. उसके बाद वहां और संख्या बढी. आप विश्वास नहीं करेंगे पर दिल्ली में भोजन प्रदान के लिये 2800 केंद्र उभारे गये. इस माध्यमसे रोज वहां 10 लाख लोगों को खाना प्रदान किया जा सकता है. आज तक सुबह और शाम दोनो टाईम कूल 7 लाख लोगों को खाना दिया जा रहा है. साथही में दिल्ली सरकारने एक लाख टेस्टिंग कीट की खरेदी भी शुरू की है. 27 हजार पीपीई किट्स केंद्र सरकारने दिल्ली को दिये है. तथा रेशन दुकानोंसे गरीबोंको साडेसात किलो अनाज मोफत दिये जा रहे है. इसका फायदा कूल 71 लाख लोगोंको होने वाला है. इस में से अब तक 60 प्रतिशत लोगों में ये अनाज वितरित हुआ हैं. लॉकडाऊन के दौरान, विधवा पेंशन योजना, वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना और दिव्यांग पेंशन योजना को बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया था.

निर्माण श्रमिकों के साथ-साथ ऑटो रिक्शा चालक, रिक्शा चालक और ई-रिक्शा चालकों को 5,000 रुपये की सहायता दी गई. केजरीवाल सरकारने कोरोना के रोगियों के इलाज के दौरान मरनेवाले किसी भी स्वास्थ्य कार्यकर्ता के परिवार को 1 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का फैसला किया है. कोरोना में तीन या अधिक रोगियोंवाले क्षेत्रों में ऑपरेशन शील्ड किया गया. इस हिस्से को पूरी तरह से सील कर दिया गया था. इस क्षेत्र में स्वच्छता कीटाणुशोधन, होम डिलीवरी और होमक्वारंटाईन की व्यवस्था कि गई है, केजरीवाल खुद नियमित रूप से दिल्ली में कोरोना रोगियों की संख्या और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के साथ-साथ पत्र सम्मेलनों के माध्यम से किए जानेवाले उपायों की जानकारी देते हैं. केजरीवाल ने हमेशा पारदर्शी शासन पर जोर दिया है. तो सिस्टम के लोग भी कुछ गलत करने की धृष्टता नहीं दिखाते. कोरोना संदर्भ में होनेवाले सावधानी में वही अनुभव पाये गए है.