उद्धव का – मैं लड़नेवाला हूँ, रोनेवाला नहीं, यह दम कहा गया ?

Shivsena-MNS

विधिमंडल का अधिवेशन १५ दिन बाद से शुरू होना है। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरेने पार्टी के विधायकों की बैठक रविवार को ली। विधायकों को अपेक्षा थी की बैठक में मुख्यमंत्री बताएगे कि, शिवसेना के विधायकों के मतदारसंघ में ज्यादा से ज्यादा काम करने के लिए निधि कैसे लाया। जैसा राष्ट्रवादी के अजित पवार कर रहे हैं। शिवसेना के विधायक बडे उत्साह में थे। लेकिन बैठक में जब मुंबई के पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे सामने आए तो सब हैरान हो गए! उनका जोश थंडा पड गया। बर्वेने सीएए और एनआरसी कानुनों के बाए में विधायकों को मार्गदर्शन किया। पश्चात, उद्धवजी ने इन कानुनोंके बारेंमें अपनी भूमिका प्रस्तुत की।

ठीक उसी समय मुंबई में राज ठाकरे का लाखों का मोर्चा निकला था। उस मोर्चे को प्राप्त जनसमर्थन से शिवसेना का परेशान होना स्वाभाविक था। उद्धवजी ने हमेशा की तरह विधायकों की बैठक में विषय का रुख हिंदुत्व की ओर मोडा। कहा – ‘मैंने हिंदुत्व नहीं छोड़ा है, नहीं छोड़ूंगा; मरतें दमतक हिंदुत्व नहीं छोड़ूंगा।’ ऐसा उन्हे पिछले दो महिनों से बारबार कहना पड रहा है.
शिवसेना के विधायकों की बैठक में मुंबई पुलिस आयुक्त को बुलाकर विधायकों को सीएए और एनआरसी कानून के बारे में अवगत कराना, शिवसेना के नेतृत्व की विफलता माननी चाहिये? शिवसेना विधायकों को कोई बात समझने के लिए बाहर से किसी को बुलाना पडे, इससे बडा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?

मनसे का ‘महाअधिवेशन’ पिछले महिने हुआ। राज ठाकरे ने उसमें घोषणा की थी कि मैं मोर्चे का जवाब मोर्चे से दूँगा। सीएए और एनआरसी के खिलाफ निकले मोर्चोको राज ठाकरे के नेतृत्व में निकले मोर्चेनें करारा जवाब दिया। राजने लपका हुआ हिंदुत्व का मुद्दा ‘क्लिक’ होता नज़र आ रहा है। यह शिवसेना के लिए खतरे की घंटी है। काँग्रेस और एनसीपी के साथ जाने के कारण शिवसेना को बार – बार उसके हिंदुत्व पर सफाई देनी पड रही हैं। विधायकों की बैठक में भी उन्होंने यही राग अलापा।

राजने हिंदुत्व का मुद्दा हाथ में लेने के बाद, उनके पहले ही मोर्चे को जबरदस्त जनसमर्थन मिला। उनकी – पत्थर का जवाब पत्थर से और तलवार का जवाब तलवार, की चेतावनी में ‘ठाकरी अंदाज’ की गरज थी। राज की इस सफलता से, शिवसेना को उसका हिंदुत्व पर की पकड़ खोने का भय साफ नज़र आ रहा हैं।

राज ठाकरे के २० मिनट के भाषण में गंभीरता थी। उन्हें कोई हल्के मे नहीं ले रहा था। राज ने किसी की नकल नही की। पूरी परिपक्वता दिखाई। अब राज भविष्य में क्या चाल चलते हैं। हिंदुत्व के मुद्देपर शिवसेना को कैसे घेरते हैं इसपर उनकी राजनैतिक सफलता निर्भर होगी। साथही उन्हे लोगों को इस बात का भी भरोसा दिलाना होगा कि उनका अजेंडा भाजपा के इशारे पर तय नहीं हुआ है।

उद्धवजी ने हालही में ‘सामना’में एक साहसिक बयान दिया। कहा – शरद पवार हमारी सरकार के मार्गदर्शक हैं, रिमोट कंट्रोल नहीं। सरकारपर पवार का रिमोट कंट्रोल कितना और कैसे चल रहा है, इस बात का अंदाजा उद्धवजी को भले ही ना हो, किंतु इस बात के कई सबुत दिये जा सकते है।

उदय सामंत राज्य के उच्च तकनीक एवंम शिक्षा मंत्री हैं। उन्हें एक दिन पवार साहब का फोन आया – उच्च शिक्षा की एबीसीडी, प्राथमिक बातों के बारे में अधिक जानना चाहते हो,तो पुणे में सिम्बॉयसिस के मालिक मुजुमदार से जाकर मिलो। दूसरे दिन सामंत सिम्बॉयसिस में हाजिर हुए और सारा दिन मुजुमदार के चरणों में बैठकर उच्च शिक्षा की बारीकियाँ समझते रहें!

उद्धवजी ने मुलाकात में कहा कि, ‘मातोश्री’ और शक्ती दोनों हमेशा से साथ रहे हैं और रहेंगे। वर्तमान में सभी मंत्रियों, विधायकों और कायकर्ताओ में चर्चा है कि आज सत्ता ‘मातोश्री’पर है और शक्ती ‘सिल्व्हर ओक’ (शरद पवार के बंगले) पर!

इस मुलाकात में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने और दो बयान दिए। एक – सब शिवसैनिकों को मंत्रालय में मुक्त प्रवेश हैं। और दुसरा – यहाँ दलालों की पहुंच नहीं। हे भगवान! आपने यह क्या कह दिया उद्धवजी!! आप तथ्यों को देखोंगे तो जानोंगे कि आज मंत्रालय में दलालों का ही बोलबाला है। काँग्रेस, एनसीपी और शिवसेना इन तिन्ही पार्टियोंके मंत्रियों के गलियारों में दलाल आते – जाते है। चुपके से मंत्रियों या उनके पीए, पीएस, ओएसडी के साथ ट्रायडंट, आयनॉक्स इत्यादी स्थनों पर ‘मिटींग’ कर लेनेदेन के व्यवहार की बातें तय हैं। जनता को कम से कम आधा दर्जन ऐसे मंत्रियों के नाम पता हैं, जिनके लड़कें इन सौदों की बातचीत में बेहद सक्रिय हैं।

दुसरा बयान, सब शिवसैनिकों को मंत्रालयमें मुक्त प्रवेश है। इसका मतलब क्या है ? मंत्रालय के गेटपर अगर कोई कहता है की, ‘‘मैं शिवसैनिक हूँ ’’ तो क्या उसे तुरंत प्रवेश मिलता है? यदि उसके पास तालुका प्रमुख, जिला प्रमुख और शाखा प्रमुख होनेका व्हिजिटिंग कार्ड है, तो क्या उसे तुरंत प्रवेश दिया जाता है? नही! कतई नही. उसे भी दोपहर दो बजे के बाद प्रवेश मिलता है। उसे लाइन में खड़ा होना पड़ता है और आधिकारिक पास निकालनी होती है तब ही वह मंत्रालय में पहूंच सकता है।

अब आते है सबसे अहम मुद्दे पर। उद्धवजी, इस मुलाकात में आपने केंद्र शासनको कोसा। केंद्र शासन महाराष्ट्रको निधी देने के मामलेंमें ठंडा रुख अपनाने का राग अलापा।

आपने कहा है कि, यदि केंद्र समय पर राशी देता है, तो किसानों को अधिक सहायता देना संभव होगा. केंद्रसे राज्य को मिलनेवाले पैसों के बारें मे विलंब की बात की। इससे आपकी योजनाओंको विलंब होने का जिक्र किया। उद्धवजी, हमारे देश में कई ऐसे मुख्यमंत्री हुए हैं, जिनके विरोधी विचारोंकी आणि विरोधी पार्टीयोंकी सरकार केंद्रमें थी. बावजूद इसके उन्होने बडी हिंमतसे राज्यपर शासन किया. केंद्र शासन भुगतान नहीं करता है, इसलिए वे रोते नहीं बैठे रहें। आपसेभी उनके समानही दबंगगिरी की अपेक्षा थी; पर आपने तो पहले दो महिनों में ही हथियार डाल दिये! एन. टी. रामा राव, जयललिता, करुणानिधी, प्रकाशसिंग बादल, चंद्राबाबू नायडू, ज्योती बसू, शिवराजसिंह चौहान ऐसे दबंग मुख्यमंत्री थे जिन्होने केंद्र में उनके विरोधी सरकार होते हुये भी राज्यपर कुशलता और हिंमतसे शासन किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लंबे समय तक गुजरात के मुख्यमंत्री थें। उस समय भी कई वर्ष केंद्र में काँग्रेस सत्ता में थी फिरभी उन्होने कभी केंद्र शासनको नही कोंसा।

शिवसेनाप्रमुख बाळासाहब ठाकरे के बेटे के रूप में आपसे ऐसेही दबंगगिरी की अपेक्षा थीं। आप तो प्रारंभिक दौर में ही मायुसीभरी बातें कर रहे हो। ‘मैं लडनेवाला हूँ, रोनेवाला नहीं’ ऐसा आपही तो कहते हो ना? कहा गया वह दम ?