पालघर जिले में चलाए जा रहे गोदडी उपक्रम को राज्य में अन्य जगह भी चलाना चाहिए- सुधीर मुनगंटीवार

Sudhir Mungatiwar

मुंबई :- राज्य में कुपोषण की समस्या को कम करने के लिए सरकार विभिन्न उपाय कर रही है. इसके तहत पालघर जिला में नियोजन समिति के कोष से पालघर के जिलाधीश तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने संयुक्त रूप से एक नया उपक्रम कार्यान्वित किया है. इस उपक्रम के माध्यम से जिले में कुपोषित बालकों की माताओं को गोदडी की सिलाई का प्रशिक्षण देकर उनसे गोदड़ी सिलवाए जाती है तथा यह उत्पादन खरीद कर प्रसूत होने वाली माताओं को उपलब्ध कराया जाता है. इस गोदड़ी परियोजना के कारण स्थानीय स्तर पर कुपोषित बालकों की माताओं को रोजगार भी मिला है तथा उन्हें अच्छी राशि भी मिलती है. साथ ही काम ढूंढने के लिए अब ऐसी महिलाओं के स्थानांतर होने का प्रमाण काफी कम हो गया है.

पालघर एक आदिवासी बहुल जिला है. जहां पर महिलाओं को रोजगार के अवसर काफी कम है. इसके कारण वहां से स्थानांतर होने के प्रमाण अधिक दर्ज किए गए हैं. ऐसी स्थानांतरित महिलाएं साथ में अपने बच्चों को भी रोजगार की तलाश में ले जाती है और वहां उनके बच्चों को पर्याप्त आहार ना मिलने के कारण ऐसे बालक कुपोषित होते हैं और यह प्रमाण बढ़ता ही जा रहा है. इस बात के मद्देनजर जिले में आदिवासी तथा ग्रामीण भागों में अति तीव्र कुपोषित अर्थात एस ए एम तथा तीव्र कुपोषित बालकों (एम् ए एम्) की माताओं को गोदड़ी सीने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. एक महिला एक गोदड़ी तैयार करने में लगभग एक दिन लेती है. आंगनवाड़ी का समय समाप्त होने के उपरांत यह महिलाएं वहां पर गोदड़ी सीने का काम करती है और उन्हें प्रति गोदड़ी डेढ़ सौ रुपया दिया जाता है, जो सीधे उनके बैंक खातों में जमा होता है. इस काम का पर्यवेक्षण करने वाली आंगनवाड़ी सेविकाओं को प्रति गोदड़ी ₹20 दिया जाता है और यह भी राशि उनके बैंक खातों में जमा होती है.

यह गोदड़ी साधारता: दो मीटर X १.५ मीटर की होती है. इसमें प्रसूत महिला तथा उसके शिशु को अच्छे तरीके से सुलाया जा सकता है. तैयार किए हुए सभी गोदडियों को नजदीक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तथा उप केंद्रों में रखा जाता है और जिले में नए से प्रस्तुत होने वाली माताओं को मेडिकल अधिकारियों के माध्यम से इन का वितरण किया जाता है. जिले में तीव्र तथा अति तीव्र कुपोषित बालकों की माताओं से मौजूदा समय में 9500 गोदड़ी सिलवाए जा रही है. इस माध्यम से उन्हें 19 दिन का रोजगार और प्रत्येक महिला को 28 हजार 500 का काम उपलब्ध हुआ है. अतिरिक्त 11000 गोदडिया सीने के लिए कच्चा माल उपलब्ध करवाया गया है. इससे लगभग 22 दिवस का रोजगार प्राप्त होगा. अनेक महिलाओं को साधारण का 3300 रुपयों का काम उपलब्ध हुआ है. गोदडिया सीने का प्रशिक्षण क्षेत्र की माहिर महिलाओं से तथा उमेद यानी महाराष्ट्र राज्य जीवनोन्नती अभियान के तहत दिया जाता है. इस कारण कुपोषित बालकों की माताओं को जहां एक और काम मिलता है, वहीं उनके पास कुछ पैसा भी इकट्ठा होता है. साथ ही उन्होंने बनाई हुई गोदडिया प्रस्तुत होने वाली माताओं को और उनके शिष्यों को ठंडी से बचाने का काम करती है. पालघर जिला परिषद की महिला व बालकल्याण विभाग की ओर से यह उपक्रम चलाया जा रहा है.