आरक्षण का फडणवीस पॅटर्न बना देश के लिए दिशादर्शक

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आर्थिक दृष्टि से पिछड़ों को दस प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय केन्द्र मंत्रमंडलने और  बाद मे संसद ने उसे मंजुरी दे दि।  उसकी अब देश भर में चर्चा चल रही है। हिंदू- मुस्लिम- ईसाइ सब धर्मों के आर्थिक पिछड़ों को इस निर्णय का लाभ मिलेगा।  हिन्दू धर्म में के ब्राह्मण, पटेल, जाट, ठाकुर जैसे सब सवर्ण समाज को इसका लाभ होगा।  महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में मराठा समाज को दिए आरक्षण पॅटर्न का उपयोग कर केंद्र ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लिया यह निर्णय केन्द्र के लिए दिशादर्शक साबित हुआ।

सवर्ण समाज में भी बड़ी संख्या में आर्थिक दुर्बल लोग हैं और उन्हें आरक्षण मिलने की आवश्यकता है यह भावना तथा माँग वर्षों पुरानी थी। उसी भावना का नरेन्द्र मोदी ने लाभ उठाया है। लोकसभा चुनाव से कुछ माह पहले ही यह निर्णय लेकर उसका राजनितिक लाभ उठाने का मोदी सरकार का प्रयास दिखाई दे रहा है।  कुछ भी हो लेकिन यह आरक्षण आर्थिक दृष्टि से पिछड़ों को बड़ी ताकत देने का काम करेगा। कुछ माह पूर्व ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में की राज्य सरकार ने मराठा समाज को १६ प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। देश में के विविध राज्यों में अब तक आरक्षण के लाभ से वंचित समाज गत कुछ वर्षों से आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहें हैं। ये समाज संपन्न हैं और उन्हें आरक्षण की आवश्यकता नहीं है, ऐसा तर्क दिया जाता था; उसी समय उस समाज में की बेरोजगारी, दरिद्रता तथा उनका पिछड़ापन अधोरेखित करनेवाले रिपोर्ट भी प्राप्त हुए थे। उन रिपोर्ट के आधार पर उनकी आरक्षण की माँग तेज हुई थी और आंदोलन कई स्थानों पर हिंसक हो गए थें।

महाराष्ट्र ने गत देड – दो वर्षों में मराठा आरक्षण के आंदोलनों का अनुभव लिया। लाखों के मोर्चे शांततापूर्वक निकले। कई स्थानों पर हिंसक आंदोलन भी हुए। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अत्यंत संयम के साथ स्थिति संभाली।  इससे पहले की सरकार ने मराठा समाज को आरक्षण दिया था लेकिन वह न्यायालय में टिक नहीं सका। इस कारण न्यायालय में भी टिक सके ऐसा कानून की व्याख्या में सही साबित होनेवाला आरक्षण देंगे इस भूमिका से फडणवीस ने राज्य पिछड़ा आयोग से मराठा समाज के पिछड़े होने का रिपोर्ट बनवा लिया और उसके आधार पर आरक्षण का निर्णय लिया। एसबीसी मतलब सामाजिक तथा शिक्षा की दृष्टी से पिछड़ों की श्रेणी में मराठा समाज को आरक्षण दिया गया है। उसी तर्क के आधार पर केन्द्र सरकार ने आर्थिक दृष्टि से पिछड़ों को दस प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया।

आरक्षण के लिए सर्वोच्च न्यायालयने ५० प्रतिशत की मर्यादा निश्चित की है लेकिन साथी ही  – ५० प्रतिशत से अधिक आरक्षण देना हो तो, जी समाज को यह आरक्षण देना है वह समाज आर्थिक तथा शिक्षा के संदर्भ में पिछड़ा है, इसके सबूत देने होगे ऐसा कहा है। इसी का आधार लेकर राज्य सरकार ने मराठा समाज को आरक्षण दिया और इस समाज का पिछड़ापन न्यायालय में सिद्ध करने की पूरी तैयारी की है। केंद्र सरकार ने भी सोमवार को बिलकुल यही किया। मराठा आरक्षण का महाराष्ट्र पॅटर्न केन्द्र ने अपनाया है। स्वयं कानून के अभ्यासक रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लिया मराठा आरक्षण का निर्णय इस प्रकार देश में अनेक समाज के आरक्षण की घेराबंदी तोड़नेवाला सिद्ध हुआ है।

पहले किसी समय महाराष्ट्र ने देश को रोजगार गारंटी योजना दी।  महाराष्ट्र ने देश को सुचना का अधिकार दिया। आज मराठा आरक्षण के माध्यम से सामाजिक तथा शिक्षा में पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण देने का पॅटर्न देश को देकर, विविध समाज में व्याप्त असंतोष की भावना दूर करने में महाराष्ट्र ने अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया है।