अगुस्ता हेलिकॉप्टर घोटाले में आया पीएमओ का नाम

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नई दिल्ली: अगुस्ता हेलिकॉप्टर घोटाले में अब प्रधानमंत्री कार्यालय का नाम भी आ रहा है. अगुस्ता हेलिकॉप्टर घोटाले में गिरफ्तार पूर्व वायुसेना प्रमुख एसपी त्यागी के वकील में अदालत में सुनवाई के दौरान कहा कि हेलिकॉप्टर के मानक बदलने का फैसला यूपीए राज में हुआ था. त्यागी के वकील ने कहा, ‘पीएम ऑफिस ने सुझाव दिया था कि वीवीआईपी चॉपर डील के लिए ऊंचाई में बदलाव किए जाएं.’

वीवीआईपी घोटाला केस में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने पूर्व वायुसेना प्रमुख, एसपी त्यागी को चार दिन की सीबीआई रिमांड में भेज दिया. उनके सह-आरोपी और चचेरे भाई, संजीव त्यागी सहित वकील गौतम खेतान को भी चार दिन की रिमांड मे भेज दिया.

सीबीआई ने कोर्ट से दस दिन रिमांड की मांग की थी. सीबीआई की दलील थी कि एसपी त्यागी के कार्यकाल के दौरान ही वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे को अगूस्ता वेस्टलैंड के पक्ष में किया गया. सीबीआई के मुताबिक, वीवीआईपी हेलिकॉप्टर खरीदने की शुरूआत १९९९ में हुई थी. तब तक वीवीइईपी एमआई८ हेलिकॉप्टर में यात्रा करते थे. लेकिन वे पुराने पड़ चुके थे. सीबीआई के मुताबिक, वर्ष २००४ तक वायुसेना चाहती थी कि वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की सीलिंग ६००० मीटर हो,ताकि सियाचिन और लेह लद्दाख जैसे इलाकों में जिने मे कोई दिक्कत ना हो. लेकिन एसपी त्यागी के आते ही सीलिंग को ४५०० मीटर कर दिया गया, क्योंकि अगूस्ता हेलिकॉप्टर ६००० मीटर तक नहीं उड़ान भर पाता था.

इसके साथ ही एसपी त्यागी ने टेंडर प्रक्रिया में पहले ‘टूइन-इंजन’ और बाद में ‘कम से कम दो इंजन’ का क्लॉज डलवा दिया (क्योंकि आखिरी प्रक्रिया में सिर्फ दो ही कंपनियां बची थीं- यूरोकॉप्टर और अगूस्ता. अगूस्ता में तीन इंजन लगे थे. सीबीआई की दलील थी कि जब वे वायुसेना प्रमुख थे, तब वे अपने चचेरे भाई जूली त्यागी के घर पर अगूस्ता के अधिकारियों से मिले थे. जबकि तब टेंडर प्रक्रिया जारी थी.

सीबीआई की दलील थी कि एसपी त्यागी ने अपने कार्यकाल के दौरान बड़ी तादाद में खेती की जमीन खरीदी और इसके बारे में सरकार को जानकारी नहीं दी. सीबीआई के वकील ने कहा कि इस मामले में एक सरकारी अधिकारी को घूस दी गई है. यह बेहद संवेदनशील मामला है, जिसका अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव है इसलिए रिमांड जरूरत है सौदे की मनी-ट्रेल, त्यागी की संपत्ति और तीपों ओरोपियों की क्रॉस-एग्जामनेशन के लिए.

इसपर एसपी त्यागी के वकील की दलील थी कि वीवीआईपी हेलिकॉप्टर की तकनीकी मानक ( ‘टेक्निकल स्पिशेफिकेशन’) पीएमओ यानि प्रधानमंत्री कार्यालय के कहने पर बदले गए थे (सीलिंग ६००० से घटाकर ४५०० मीटर करना), क्योंकि सरकार नहीं चाहती थी कि सौदे में सिंगल वेंडर हो (जैसाकि हो गया था सौदे में पहले सिर्फ यूरोकॉप्टर कंपनी का ईसी २४ हेलिकॉप्टर ही रह गया था).

सीलिंग की वजह से अगूस्ता भी सौदे की प्रक्रिया से बाहर हो गया था. इसलिए पीएमओ के कहने पर मानक बदले गए. खुद पीएमओ ने वायुसेना प्रमुख और रक्षा सचिव को इस मसौदे पर अपनी राय देने के लिए कहा था. जिसके बाद ही सीलिंग को घटाकर ४५०० मीटर किया गया. त्यागी के वकील के मुताबिक, ये सभी का साझा फैसला था (‘क्लेकटिव-डीजिशन’) क्योंकि वायुसेना तो किसी भी रक्षा सौदे में अकेले कुछ नहीं खरीद सकती.

इस बीच कोर्ट में खुद एसपी त्यागी बोल उठे कि जिस जमीन की बात सीबीआई कर रही है वे उन्होने २००२ में खरीदी थी और इसका लेखा-जोखा वे सीबीआई को दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि वे ‘कहीं भाग कर नहीं जा रहे हैं यहीं पर हैं’. लेकिन फिर भी अगर सीबीआई चाहती है तो उन्हे गिरफ्तार कर सकती है. सीबीआई ने जब भी उन्हें समन किया है, वे जांच में शामिल हुए हैं. उन्होंने कहा की एक वायुसेना प्रमुख तभी टीवी (चैनल्स) पर आता है, जबकि वह गिरफ्तार होता है.

खेतान के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल पहले भी ईडी द्वारा गिरफ्तार किया गया था. फिर से गिरफ्तार करने की कोई जरूरत नहीं है. इसपर सीबीआई ने कहा कि इटली, ट्यूनिशिया और मॉरीशस से नई एलआर (लेटर रॉगेटरी) आएं हैं जिनमें कुछ नए तथ्य सामने आए हैं. इसलिए रिमांड जरूरी है.

करीब ढाई घंटे तक चली जिरह के बाद अदालत ने कहा कि केस की ‘निष्पक्ष जांच’ और ‘गंभीरता’ को देखते हुए तीनों आरोपियों को १४ दिसम्बर तक की सीबीआई रिमांड में भेजा जाता है.