‘विक्रम’ टूटा नहीं, थोड़ा टेड़ा खड़ा है; संपर्क करने के प्रयास जारी

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‘विक्रम’ ने हार्ड लैंडिंग की है और ऑर्बिटर के कॅमेरे की तस्वीर से पता चलता है कि वह निर्धारत स्थल के आसपास ही खड़ा है लेकिन, थोड़ा टेढ़ा खड़ा है। विक्रम टूटा नहीं। उससे दोबारा संपर्क होने की संभावना अभी भी करीब ६० से ७० प्रतिशत है।


बेंगलुरु : ‘विक्रम’ ने हार्ड लैंडिंग की है और ऑर्बिटर के कॅमेरे की तस्वीर से पता चलता है कि वह निर्धारत स्थल के आसपास ही खड़ा है; लेकिन थोड़ा टेढ़ा खड़ा है। विक्रम टुटा नहीं। उससे दोबारा संपर्क होने की संभावना अभी भी करीब ६० से ७० प्रतिशत है।

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चंद्रयान- 2 मिशन से जुड़े इस्रो के एक ऑफिसर ने बताया कि विक्रम लैंडर पूरी तरह क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। उसमें कोई टूट-फूट नहीं हुई है और पूरा भाग चांद की सतह पर थोड़ा टेड़ा खड़ा है। , ‘विक्रम ने हार्ड लैंडिंग की है और ऑर्बिटर के कैमरे ने जो तस्वीर भेजी है, उससे पता चलता है कि वह निर्धारत स्थल के आसपास ही खड़ा है। उसका पूरा हिस्सा सुरक्षित है।’

इस्रो के पूर्व चीफ माधवन नायर ने यह जानकरी मिलने पर कहा कि विक्रम से दोबारा संपर्क साधे जाने की अब भी 60 से 70 प्रतिशत संभावना है। वैज्ञानिक और डीआरडीओ के पूर्व संयुक्त निदेशक व्ही. एन. झा ने भी कहा कि किसी भी दिन विक्रम से संपर्क जुड़ सकता है।

विक्रम का एक भी पुर्जा खराब हुआ होगा तो संपर्क साधना संभव नहीं हो पाएगा, यह वास्तविकता है। लेकिन, अब तक मिले संकेत अच्छे हैं। विक्रम ने अगर सॉफ्ट लँडिंग हुई है तो उससे पुनः जल्द संपर्क होने की संभावना बहुत ज्यादा है।

इस्रो के सूत्रों का कहना है कि हमें जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में खोए एक स्पेसक्राफ्ट को ढूँढने का अनुभव है। लेकिन, चाँद पर उस तरह की ऑपरेशन फ्लेक्सिबिलिटी नहीं है। विक्रम चाँद पर पड़ा है और हम उसे हिला-डुला नहीं सकते।

अगर विक्रम का एंटिना सही हो तो भी काम बन सकता है। एंटिना का रुख अगर ग्राउंड स्टेशन या ऑर्बिटर की तरफ हो तो काम आसान हो जाएगा। इस तरह का ऑपरेशन बहुत कठिन होता है। लेकिन, अच्छी उम्मीद है।

विक्रम ऊर्जा की खपत कर रहा है लेकिन जिसकी कोई चिंता नहीं है; क्योंकि उसमें सोलर पॅनल लगे हैं। साथ ही उसके अंदर की बैट्री भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुई है।