मराठवाड़ा, प. महाराष्ट्र के दोनों पक्षों के अनेक दिग्गजों ने साख गंवाई

विदर्भ में भाजपा व फडणवीस का जादू चला

मुंबई : महाराष्ट्र में प्रथम चरण के पालिका चुनावों में हालांकि विपक्ष की नोटबंदी तथा राज्य सरकार की विफलताओं को मुद्दा बनाने की विपक्षी दिग्गजों की पुरजोर कोशिशें नाकाम रहीं, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा और शिवसेना के अनेक दिग्गज भी मतदाताओं पर अपने प्रभाव बनाने और सरकार की उवलब्धियां भुनाने में असफल रहे. मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र के अनेक सत्तारूढ़ व विपक्षी बड़े नेता विफलता के शिकार बन गए हैं.

इनमें ग्रामीण विकास और महिला व बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे को जहां मराठवाड़ा के बीड़ जिले के परली वैजनाथ में अपने चचेरे भाई एनसीपी नेता धनंजय मुंडे से मुंह की कहानी पड़ी. वहां धनंजय मुंडे की मेहनत रंग लाई. इसी प्रकार प्रदेश भाजपाध्यक्ष सांसद रावसाहेब दानवे, जलापूर्ति मंत्री बबनराव लोणीकर के साथ एनसीपी के बड़े दिग्गज छगन भुजबल भी प्रभावहीन साबित हुए.

प्रदेश भाजपाध्यक्ष सांसद दानवे के भोकरदन नगरपालिका में करारी हार का सामना करना पड़ा है. उन्होंने अपनी इस हार को स्थनीय जातीय समीकरण को जिम्मेदार बताया है. जलापूर्ति मंत्री लोणीकर भी अपने गढ़ परतूर को बचा नहीं पाए. वहां नगराध्यक्ष के चुनाव में स्वयं उनकी पत्नी को पराजय का मुंह देखना पड़ा.

इधर एनसीपी के बड़े नेता छगन भुजबल येवला की और उनके पुत्र पंकज भुजबल अपने नांदगांव की दोनों नगरपालिकाओं को बचा नहीं पाए. पूर्व मुख्यमंत्री व दिग्गज कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण भी कराड से अपने गठबंधन के उम्मीद्वार की लुटिया डूबने से नहीं बचा पाए. कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे भी अपने विधानसभा क्षेत्र के मालवण नगरपालिका को भाजपा-सेना युति के हाथों गवां बैठे.

एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे रोहा और श्रीवर्धन दोनों ही पालिकाओं में जीत हासिल करने में सफल रहे. ठाणे के पालक मंत्री एकनाथ शिंदे भी मोखाड़ा में अपना वर्चस्व कायम रखा. विधानसभा में विरोधी पक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने शिर्डी नगरपंचायत तो गवां बैठे, किन्तु उन्होने राहता नगरपालिका को बचाने में सफलता पाई. लेकिन एनसीपी के बड़े नेता जयंत पाटिल इस्लामपुर नगरपालिका बचा नहीं सके.

विदर्भ में स्थितियां सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में

विदर्भ में स्थितियां सत्तारूढ़ भाजपा के पक्ष में नजर आईं. यहां नोटबंदी के बाद विदर्भ में भी भाजपा ने कांग्रेस और राकांपा के गढ़ों में सेंध लगाई है. अमरावती, वर्धा, यवतमाल, चंद्रपुर समेत पश्‍चिम विदर्भ के अकोला, बुलढाणा और वाशिम में नगरसेवकों की अधिकांश सीटों के अलावा नगराध्यक्षों के पद पर भी भाजपा-शिवसेना ने जीत दर्ज कर शहरी क्षेत्र के वोट बैंक पर कब्जा जमाने में सफलता पाई है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन चुनावों में अपने दाल के स्टार प्रचारक सिद्ध हुए. उन्होंने विदर्भ में संपन्न नगर पालिका चुनाव में तूफानी प्रचार कर इस चुनाव को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मुद्दा बना दिया था. चुनाव परिणाम से यह साफ हो गया कि फडणवीस बड़ी संख्या में अपने लिए एक नई टीम को निर्वाचित करवाने में सफल रहे हैं. इसी प्रकार मुख्यमंत्री के साथी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के करीबी समझे जाने वाले वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने चंद्रपुर जिले की राजनीति पर अपनी पकड़ निर्विवाद रूप से साबित कर दी है. वहां चार में से तीन नगर पालिकाओं पर भाजपा का कब्जा हुआ है, जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विधायक विजय वडेट्टीवार को करारा झटका लगा है. वे केवल एक नगरपालिका पर कब्जा कर सके हैं. सिंदेवाही में नगर पंचायत भाजपा की होगी.

वर्धा जिले में सांसद रामदास तड़स के साथ ही पालक मंत्री के रूप में सुधीर मुनगंटीवार की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी. वहां छह की छह नगरपालिका पर भाजपा ने भगवा फहरा दिया है. आर्वी में तो उसे 23 की 23 सीटों पर जीत हासिल हुई है.

यवतमाल जिले की 8 नगरपालिकाओं में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया है, हालांकि उसे नगराध्यक्ष पद की एक भी जगह नहीं मिल सकी. कांग्रेस ने अपनी सत्ता चंद्रपुर के राजुरा और अमरावती के चांदुररेलवे नपा में बरकरार रखी है. अमरावती की 9 में से 7 नगरपालिकाओं में भाजपा ने कब्जा जमाया है. चंद्रपुर जिले की 4 नगरपालिकाओं और एक नगर पंचायत में भी भाजपा ने बाजी मारी.

यवतमाल जिले में कांग्रेस के दिग्गज नेता विधान परिषद के उपसभापति माणिकराव ठाकरे की प्रतिष्ठा धूल में मिल गई है. कांग्रेस को नगराध्यक्ष का एक भी पद हाथ नहीं लगा है. इसी प्रकार भाजपा के दिग्गज मदन येरावार ने यवतमाल में नगराध्यक्ष को अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाया था, लेकिन शिवसेना के हाथों उन्हें बुरी हार का सामना करना पड़ा है. यवतमाल जिले में एमआईएम को भी चुनावी सफलता मिली है.

अमरावती जिले में पालकमंत्री प्रवीण पाटिल पोटे ने भी भाजपा को शानदार सफलता दिलवाई. वहां सात नगर पालिकाओं में भाजपा सत्ता पाने में सफल रही. कांग्रेस के दिग्गज विधायक भाई जगताप ने ही कुछ दमदार प्रदर्शन किया और चांदुर रेलवे में जीत दर्ज की. भाजपा के दिग्गज पूर्व विधायक अरुण अडसड के पुत्र प्रताप ने धामणगांव रेलवे में नगराध्यक्ष पद अपनी झोली में डालते हुए लंबे समय बाद अपने पिता को जीत का स्वाद चखाया.

यवतमाल में 8 में से 3 नगराध्यक्ष पद पर शिवसेना ने कब्जा जमाया. भाजपा को 2, जबकि राकांपा को एक जगह मिली. 2 जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी, लेकिन ये दोनों शिवसेना के बागी माने जाते हैं. यवतमाल में शिवसेना की कांचन बालासाहब चौधरी 7000 से अधिक वोट की बढ़त के साथ जीतीं. उन्होंने भाजपा की रेखा कोठेकर को पराजित किया. पुसद में राकांपा नेता विधायक मनोहरराव नाईक की पत्नी अनिता नाईक ने भाजपा-सेना युति की अर्चना जायसवाल को हराया. उमरखेड़ की जगह कायम रखने में भाजपा विधायक राजेंद्र नजरधने को सफलता मिली.

शिवसेना के गढ़ दिग्रस में शिवसेना के बागी मोहम्मद जावेद पहलवान की पत्नी सदफजहां ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की. पालकमंत्री संजय राठौड़ के निर्वाचन क्षेत्र के दारव्हा नगराध्यक्ष पद पर शिवसेना के बबन इरवे सिर्फ 45 वोट से जीते. उन्होंने कांग्रेस-राकांपा के सिद्धार्थ गड़पायले को करीबी शिकस्त दी. वणी में भाजपा के तारेंद्र बोर्डे ने सफलता अजिर्त की. घाटंजी नप में शिवसेना के निलंबित उपजिला प्रमुख शैलेश ठाकुर की पत्नी नयना ठाकुर विजयी रही.

अकोला की 5 में से 3 न.प. पर भाजपा ने जीत हासिल की है, वहीं बालापुर एवं पातुर में कांग्रेस ने नगराध्यक्ष का सम्मान प्राप्त किया. वैसे पातुर में 17 सदस्यों में से राकांपा के 8 उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर बहुमत के करीब पहुंचने में सफलता तो अजिर्त की है, लेकिन नगराध्यक्ष कांग्रेस की चुनी जाने से सत्ता कांग्रेस की होगी. अकोट में पहले कांग्रेस की सत्ता थी अब भाजपा के हरिनारायण माकोडे. ने 17596 वोट प्राप्त कर भारिपा बमसं के सै. शरीफ राणा को 6911 वोटों से हराकर नगराध्यक्ष पद प्राप्त किया. पार्षद के 33 पदों में से भाजपा के 17 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. मुर्तिजापुर में पहले राकांपा की सत्ता थी, इस बार भाजपा की मोनाली कमलाकर गावंडे ने शिवसेना की संगीता गुल्हाणे को हरा कर नगराध्यक्ष पद हासिल किया.

पार्षद के 23 पदों में से 7 पर भाजपा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. तेल्हारा में भाजपा एवं किसान पैनल ने दोबारा जीत हासिल की है. जयश्री पुंडकर ने 2600 वोट हासिल कर पूर्व नगराध्यक्ष कान्होपात्रा फाटकर को हराया. पार्षद के 17 पदों में से किसान पैनल के 6 तथा भाजपा के 4 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. कांग्रेस की प्रभा भीमराव कोथलकर ने राकांपा की मंगला संतोष वानखड़े को हराया.