शिवसेना के समझ से परे है सोनिया जी की भूमिका और पवार की चाल

राष्ट्रवादी के अध्यक्ष शरद पवार ४ नव्हंबर को दिल्ली में कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मिले। महाराष्ट्र में सरकार स्थापन करने के लिए समर्थन देने की बिनती की। उस समय का, अब तक बहुत कम लोगों को पता है ऐसा वाकया –

सोनिया जी और शरद पर के बीच चर्चा हुई। सोनिया जी के केबिन में राष्ट्रपुरुषों के ८ फोटो लगे हैं। उनमें महात्मा गाँधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के फोटो हैं। चर्चा शुरू होते ही पवार ने कहा कि महाराष्ट्र के व्यापक हित में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से दूर रखने के लिए शिवसेना-कांग्रेस-राष्ट्रवादी ने साथ आना चाहिए, ये समय की माँग है। गत ५ वर्ष राज्य में भाजपा – शिवसेना की सत्ता थी तब भाजपाने कांग्रेस और राष्ट्रवादी को मिटाने का एक भी अवसर नहीं गवाया। अब, भाजपा को सत्ता से दूर रखने का सुनहरा मौका हमारे पास है उसे खोना नहीं चाहिए। पवार ने पूरी सियासी कुशलता दाँव पर लगाकर चालाक वकील की तरह सोनिया जी को ‘महाशिव गठबंधन’ सरकार बनने की आवश्यकता का महत्त्व समझाने की कोशीश की। सोनिया जी सब शांतता से सुन रही थीं। पवार उनका चेहरा पढ़कर उनके मन की बात भाँपने का प्रयास कर रहे थे। चाणक्य पवार को सोनिया जी का मूड समझ नहीं आ रहा था।वे और जोर देकर महाशिव गठबंधन की वकालत कर रहे थें। पवार की बातें सुनने के बाद, गंभीर होकर सोनिया जी ने दिवार पर टंगें आठों फोटो पर नज़र दौडाई और पवार से कहा – पवार जी, हमारी कांग्रेस पार्टी इन महान नेताओं के प्रिन्सिपल पे चलती है. सत्ता पाने के लिए हम कुछ भी कॉम्प्रमाईज नहीं कर सकते. कांग्रेस किसी भी हालत में शिवसेना के साथ नहीं जा सकती; आप को जाना है, जाइए। कुछ समय बाद बैठक खत्म हो गई। पवार सोनिया जी को मनाने में सफल नहीं हो पाए।

बैठक से बाहर आने के बाद पवार ने यह सब मीडिया से छिपाकर रखा। कांग्रेस ने महाशिव गठबंधन को समर्थन देने से इन्कार किया है, यह नहीं बताया। इतना ही कहा, मैं मुंबई जाकर कांग्रेस – राष्ट्रवादी के नेताओं के साथ चर्चा करूँगा और फिर सोनिया जी से मिलूँगा।

पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेसने अभी तक, सरकार बनाने के लिए हम शिवसेना को समर्थन देते है ऐसी घोषणा नहीं की है। विधायकों के समर्थन की चिट्ठी भी राष्ट्रवादी ने शिवसेना को नहीं दी है।फिर भी पवार बाहर बताते है कि शिवसेना-राष्ट्रवादी-काँग्रेस की सरकार ५ वर्ष चलेगी ! पवार साहब, जो सरकार ५ वर्ष चलेगी ऐसा भरोसा आप देते है पहले उस सरकार को समर्थन तो घोषित करो। अब तक जिस सरकार को आपके या कांग्रेस के समर्थन का अता – पता भी नहीं वह सरकार ५ वर्ष टिकेगी कैसे ? झी मराठी पर एक सीरियल आई थी ‘खुलता कळी खुलेना’ (फूल की कली खिल नहीं रही) उसी तर्ज पर महाराष्ट्र में सत्ता के राजनीति के गलियारे में नया नाटक चल रहा है – ‘कळता पवार कळेना’ (पवार का भेद नहीं खुलता) ।

वास्तविकता यह है कि कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व कभी भी सरकार बनाने के लिए भीतर या बाहर से शिवसेना समर्थन नहीं देगी। क्योंकि, उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का विचार करना होता है। दलित-मुस्लिम कांग्रेस की परंपरागत व्होट बँक हैं। शिवसेना को समर्थन देते हैं तो यह व्होट बॅंक छिटक जाएगी ऐसा डर कांग्रेस के नेतृत्व को हैं। राहुल गांधी केरल के जिस वायनाड मतदारसंघ से सांसद हैं उस मतदारसंघ में ६५ प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। सरकार बनाने के लिए कांग्रेस शिवसेना को समर्थन दे सकती हैं इस समाचार से ही दक्षिण के राज्यों के मुस्लिम मतदाता अस्वस्थ हैं।

आप सोच रहे होंगे कि कांग्रेस नेतृत्व को शिवसेना को समर्थन देना ही नहीं है तो अहमद पटेल के साथ कांग्रेस के ३ नेता मुंबई क्यों आए थें? उत्तर आसान है, शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाना नहीं हैं यह निर्णय तुरंत घोषित किया तो कांग्रेस के विधायकों का एक बड़ा गुट टूटकर राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ जा सकता हैं, ऐसा डर कांग्रेस नेतृत्व को हैं । यह खतरा टालने के लिए कांग्रेस ने समर्थन का निर्णय तुरंत घोषित नहीं करने का फैसला लिया है और अपने विधयकों के समाधान के लिए ३ नेताओं को दिल्ली से मुंबई भेजा।

शिवसेना को इतनी सीधी बात समझ नहीं आ रही कि कांग्रेस – राष्ट्रवादी को शिवसेना को समर्थन नहीं देना है। उसी समय उन्होंने ऐसी भी पूरी व्यवस्था कर दी है शिवसेना फिर भाजपा के साथ न जाए; वह ऐसे –

  • १) राष्ट्रवादी कांग्रेस ढाई वर्ष के लिए मुख्यमंत्रिपद माँगेगी।
  • २ ) कांग्रेस सत्ता में सहभागी होती हैं तो पूरे ५ वर्ष के लिए उपमुख्यमंत्रिपद माँगेगी या ढेड वर्ष के लिए मुख्यमंत्रिपद तिनों में बाँट लेने के लिए अड जाएगी।
  • ३) कांग्रेस माँग करेंगी कि २०२४ का चुनाव तिनों मिलकर लड़े और उसके लिए सीट शेअरिंग का फॉर्म्युला अभी ही निश्चित कर लिया जाए।
  • ४) कांग्रेस और राष्ट्रवादी दोनों ही विधानसभा अध्यक्षपद के लिए अडी रहेगी।
  • ५ ) तिनों दलों की एक समन्वय समिती बनाई जाय और शरद पवार उस समिति के अध्यक्ष हो, ऐसा नया शगूफा राष्ट्रवादी छोडेगी।