अरुण जेटली ने कहा,’आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को आरक्षण देना संविधान के मूल ढांचे के विपरीत नहीं है’

Arun Jaitley

नई दिल्ली: सामान्य वर्ग को १० फीसदी आरक्षण देने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से पिछड़े तबके के लोगों को दस फीसदी आरक्षण देना संविधान के मूल ढांचे के विपरीत नहीं है.

अपने फेसबुक पर लिखते हुए अरुण जेटली ने कहा गरीबी एक धर्मनिरपेक्ष मापदंड है और यह किसी भी समुदाय या धर्म के व्यक्ति हो सकता है। गरीबी के आधार पर आरक्षण दिया जाना किसी भी तरह से संविधान के मूल ढांचे के विपरीत नहीं है। उन्होंने कहा कि गरीबी आधारित आरक्षण देने का प्रधानमंत्री का निर्णय सामान्य वर्ग के गरीबों को ‘‘सबसे बड़ी मान्यता या उनके प्रति सरोकार को दर्शाता’ है और गरीबी उन्मूलन की आवश्यकता पर जोर देना है।

मंत्री ने कहा, ‘‘मुख्य विपक्षी दल ने केवल जुबानी सहानुभूति दिखाई और उसने अनिच्छा से इसका समर्थन किया। साथ ही इसमें कई खामियां निकालीं’’ उन्होंने सरकार के अन्य कदम, जैसे हर गरीब ग्रामीण को घर देना, स्वास्थ्य योजना – आयुष्मान भारत और ब्याज में सब्सिडी देने जैसे उपायों की भी चर्चा की.

उन्होंने लिखा कि “भारत में जाति को सामाजिक या ऐतिहासिक दमन का मुख्य कारक माना जाता है जैसा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मामले में होता है अथवा उसे सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन में कारक माना जाता है जैसा कि अन्य पिछड़ा वर्ग मामले में होता है.”

गौरतलब है की मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर १० प्रतिशत आरक्षण देने वाला विधेयक लोकसभा और राज्य सभा से पास करा लिया है. जिसके बाद आरक्षण ५० प्रतिशत से बढ़कर ६० प्रतिशत होगया है.