वायुसेना उपप्रमुख ने फ्रांस में उड़ाया ‘राफेल’

Air force chief

नई दिल्ली : भारतीय वायुसेना के उपप्रमुख एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार ने बृहस्पतिवार को भारत के लिए बनाए गए पहले लड़ाकू विमान ‘राफेल’ उड़ाया। उन्होंने ८० मिनट तक हवा में उसे जाँचा। यह लड़ाकू विमान भारतीय जरूरतों के मुताबिक लगाए गए सॉफ्टवेयर और सिस्टम से लैस है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, नांबियार चार दिन पहले डसॉल्ट एविएशन द्वारा राफेल विमान बनाए जाने की प्रगति का आकलन करने वह फ्रांस गये हैं। इन विमानों को भारत को सौंपने का काम अगले साल सितंबर से शुरू होगा।

भारत के लिहाज से विमान तैयार करने और उसमें हथियार प्रणाली शामिल करने में डसॉल्ट एविएशन की मदद करने के लिए भारतीय वायु सेना की एक टीम पहले से ही फ्रांस में गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, राफेल विमानों के आने के बाद भारतीय वायुसेना में क्रांति आएगी।

राफेल विमानों की सरकारी खरीद से जुड़े समझौते राजनितिक विवाद जारी है। विपक्ष मोदी सरकार पर राफेल डील में घोटाले का आरोप लगा रहा है। वहीं, सरकार इसमें पारदर्शिता की बात कह रही है। वायुसेना भी राफेल विमान के पक्ष में है।

२०१६ में भारत और फ्रांस सरकार के बीच ३६ राफेल विमान खरीदने के लिए ५९ हजार करोड़ रुपये का सौदा हुआ है। कांग्रेस का आरोप है कि यूपीए सरकार में ५२६ करोड़ रुपये में एक राफेल विमान खरीदने का सौदा हुआ था, जिसे मोदी सरकार १९७० करोड़ रुपये में खरीद रही है।