उद्धव- देवेंद्र के बाद राऊत के निशाने पर मोदी-शाह

शिवसेना महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ महाशिवगठबंधन की सरकार बनने के सपने देख रही है। दस दिन पहले भारतीय जनता पार्टी के सुधीर मुनगंटीवार दावा कर रहे थे कि ‘शुभ समाचार’ कभी भी आ सकता है। अब महाशिवगठबंधन का ‘शुभ समाचार’ कभी भी आ सकता है।

लेकिन, यह महाशिवगठबंधन सत्ता स्थापित करेगा ऐसा विश्वास के साथ नहीं कहा जा सकता. हाँ, उनकी सत्ता आने की संभावना है। जिस गठबंधन में कांग्रेस, राष्ट्रवादी और शिवसेना जैसे परस्परविरोधी विचारों की सियासी पार्टियाँ हैं उस गठबंधन की सरकार का शपथविधि होने तक कुछ भी कहा नहीं जा सकता।

दरम्यान, संजय राऊत उनकी तथाकथित ॲन्जिओप्लास्टी के एक ही दिन बाद पूरी तरह स्वस्थ होकर बडबड़ा रहे हैं। बारामती में बारिश हुई तो राऊत मुंबई में छत्री खोलकर घूमते है; यह किसे से छुपा नहीं है। पवार उनका उपयोग कर अपनी सियासी चाल चलते हैं। पवार का मोहरा बनकर संजय राउत ने पहले भाजपा और शिवसेना के बीच दरार निर्माण की फिर उद्धव ठाकरे को शरद पवार और सोनिया गांधी के शरण में जाने को बाध्य किया। आज तक बड़े -बड़े लोग ‘मातोश्री’ पर आते थें। ठाकरे को झुककर सलाम करते थें। आज ठाकरे दूसरों को सलाम करते घूम रहें हैं!

सबसे पहले, दुनिया की ‘फास्टेस्ट ॲन्जिओप्लास्टी’ के लिए संजय राउत को बधाई देनी चाहिए। जिस दिन उनपर ॲन्जिओप्लास्टी हुई उसी दिन वे अग्रलेख लिख रहे थें ! यह विश्व का बहुत बड़ा चमत्कार और वैद्यकीय विज्ञान के लिए बहुत बड़ा आव्हान हैं। इससे पहले ॲन्जिओप्लास्टी के बाद किसी भी रुग्ण की इतनी ‘फास्टेस्ट रिकव्हरी’ नहीं हुई है। राउत ने यह कमाल कर दिखाया है! दो दिन पहले एक फेसबुक पर पोस्ट व्हायरल हुई है। एक विख्यात डॉक्टर ने यह पोस्ट लिखी है। उन्होंने दावा किया है कि संजय राऊत की ॲन्जिओप्लास्टी हुई ही नहीं ! ऐसा दावा उन्होंने किया है। लगता है यह कुछ ज्यादती हो रही है। पोस्ट डालनेवाले डॉक्टर का दावा गलत है यह सिद्ध करने के लिए संजय राऊत उनकी ॲन्जिओप्लास्टी के सब मेडिकल रिपोर्ट पब्लिक के लिए सार्वजनिक करें ऐसी इच्छा उनके समर्थकों और गत कुछ दिनों में बढ़े हुए उनके प्रशंसकों की हैं। सच्चाई दुनिया के सामने आनी ही चाहिए। स्वाभिमानी राऊत स्वयं को सच्चा साबित करने के लिए जल्द ही यह कागज-पत्र सार्वजनिक करेंगे ऐसा विश्वास है।

ॲन्जिओप्लास्टी से नया विश्वास मिलने के बाद संजय राउत अब नई चाल चल रहे हैं। पहले उन्होंने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और देवेन्द्र फडणवीस के संबंधों में दरार निर्माण की। उसमें सफलता मिलने के बाद अब वे इसी संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर के एक अभियान पर निकले हैं। अब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह के बीच कटुता निर्माण करने के प्रयास शुरु किए हैं। ॲन्जिओप्लास्टी के बाद की पहली पत्रपरिषद उनके इसी प्रयास का हिस्सा थी। इसमें उन्होंने जहाँ प्रधानमंत्री मोदी के बारे में आदर व्यक्त किया वहीं सुनियोजित तरीके से अमित शाह के बारे में संदेह निर्माण हो इस पद्धति से भाषा का प्रयोग किया। कहा – मातोश्री में बंद दरवाजे के पीछे हुई चर्चा की जानकारी मोदी जी तक पहुँची ही नहीं; इस कारण वे इस बारे में अनभिज्ञ थें।

इसका मतलब – अमित शाह नरेंद्र मोदी से संपर्क किए बिना, उनसे विश्वास के साथ चर्चा किए बिना परस्पर ही भूमिका तय करते है, ऐसी अविश्वास की चिंगारी राऊत ने छोड़ी है। स्पष्ट है की यह नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बीच विश्वास की खाई निर्माण करने का प्रयास है। उद्धव ठाकरे और फडणवीस के बीच खाई निर्माण करने में मिली सफलता के बाद राऊत को गलतफहमी है कि वें मोदी और शाह के बीच भी खाई निर्माण कर सकेंगे। लेकिन, यह खयाली पुलाव पकाते समय, मोदी और अमित शाह के बीच आपसी विश्वास के संबंध कितने दृढ़ हैं और वें दोनों मिलकर देश की सरकार कैसे सही तरीके से चला रहे हैं इसका अभ्यास राऊत ने नहीं किया है। मोदी और अमित शाह के बीच का विश्वास राऊत जैसा कोई नेता तोड़ पाएगा ऐसा लगता नहीं है। राउत के कल के बयान से राऊत का लोगों के विश्वास के संबंधों में आग लगाने का स्वभाव, जो कल तक केवल महाराष्ट्र को पता था अब पुरे देश को मालूम हो गया है।

महाशिवगठबंधन में शिवसेना को ५ वर्ष के लिए मुख्यमंत्री पद मिलेगा या नहीं इस बारे में संदेह है। अब तक कोई भी ठोस कुछ भी बोल नहीं रहा है। केवल राष्ट्रवादी के नेता नवाब मलिक ने वक्तव्य दिया है कि ५ वर्ष शिवसेना का ही मुख्यमंत्री रहेगा। लेकिन उसी समय उनके नेता शरद पवार नागपुर की पत्रपरिषद में – मुख्यमंत्री पद के बारे में क्या तय हुआ है, इस प्रश्न के उत्तर में कह रहे थें कि, इस बारे में विचार चल रहा है ! मुख़्यमंत्रिपद का मुद्दा महाशिवगठबंधन बिघाडेगा ?