नोटबंदी में डरे सायबर अपराधी

- ठगी से कर रहे तौबा - घटा सायबर अपराध का ग्राफ

Cyber Crime
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मुंबई : साइबर अपराध विशेषज्ञ मान रहे थे कि नोटबंदी के बाद डेबिट/क्रेडिट कार्ड ठगी के मामले बढ़ेंगे लेकिन मुंबई साइबर सेल के अधिकारियों की माने तो ऐसे अपराधों में कमी आई है. इसकी वजह है खाते से रकम निकालने पर फिलहाल लगी रोक है. हालांकि आशंका है कि रोक हटने के बाद इस तरह ठगी की ज्यादा वारदातें सामने आ सकतीं हैं. इसके अलावा लोगों में बढ़ रही जागरुकता के चलते भी आॅनलाइन बैंकिंग से जुड़े अपराधों में कुछ कमी आ रही है.

साइबर सेल के डीसीपी सचिन पाटिल ने बताया कि नोटबंदी के बाद डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए हो रही बड़ी ठगी के मामलों में काफी कमी आई है. क्योंकि ऐसे ज्यादातर मामलों में रकम एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर कर रातों रात निकला ली जाती थी. लेकिन फिलहाल नए नोटों की कमी है ऐसे में खाते से तय रकम से ज्यादा निकालने पर पाबंदी है. खासकर एटीएम से निकाली जाने वाली रकम प्रतिदिन ढाई हजार ही है. ऐसी ठगी करने वाले बैंक जाकर रकम निकालने का खतरा नहीं मोल लेना चाहते क्योंकि उनकी पहचान सामने आने और पकड़े जाने का खतरा बढ़ जाता है. शिकायत मिलने के बाद ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले खातों पर तुरंत रोक लगा दी जाती है ऐसे में ठगी के बाद भी रकम हाथ लगने के मौके कम ही हैं. इसलिए धोखाधड़ी करने वाले फिलहाल ठगी के जरिए रकम दूसरे खाते में भेजने से परहेज कर रहे हैं. हालांकि खुद को बैंक अधिकारी बता कर लोगों से उनके डेबिट/क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी हासिल करने और उससे खरीदारी करने की शिकायतें अब भी आ रहीं हैं.

जानेमाने साइबर अपराध विशेषज्ञ और वकील प्रशांत माली के मुताबिक डेबिट/क्रेडिट कार्ड से जुड़े ठगी के मामलों में तो कमी आई है लेकिन नोटबंदी के बाद डिजिटल वालेट से जुड़े अपराध बढ़े हैं. लोगों को चाहिए कि वे ई-वालेट के इस्तेमाल में सावधानी बरतें.

पिछले तीन महीने में बैंकों द्वारा ठगी की शिकायतें

क्या बरतें सावधानी?

फोन पर अपने बैंक खाते, डेबिट/क्रेडिट कार्ड से जुड़ी जानकारी किसी को न दें भले ही फोन करने वाला खुद को बैंक का अधिकारी बता रहा हो.

फोन करने वाला शख्स आपका नाम, कार्ड की कुछ जानकारी दें तो भी सावधान रहें क्योंकि यह चोरी से हासिल किया गया हो सकता है.

कार्ड के जरिए खरीदारी कर रहे हैं तो उसे अपने सामने स्वाइप कराएं और पिन नंबर दूसरों के नजरों से बचा कर डालें क्योंकि स्कीमर मशीन में कार्ड स्वाइप कर उसकी सारी जानकारी हासिल की जा सकती है.

वेबसाइट के जरिए भुगतान कर रहे हों तो यह सुनिश्चित कर लें कि उसमें https लिखा हो, यहां एस का मतलब सिक्योरिटी यानी सुरक्षा होती है.