कांग्रेस की रणनीति : शिवसेना भले ही जीत जाए, भाजपा न जीतने पाए

Shivsena, BJP and Congress

मुंबई : कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि मुंबई महापालिका में किसी भी परिस्थिति में भाजपा की सत्ता न आने पाए, भले ही शिवसेना एकबार फिर आ जाए तो चलेगा.

राज्य की महापालिका और जिला परिषद चुनावों में जैसे भी हो, भाजपा को रोको और शिवसेना को सॉफ्टटार्गेट बनाओ, ऐसी राजनीति रणनीति कांग्रेस ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए बनाई है. ताकि यदि भाजपा को उसे रोकने में सफलता मिली तो देश भर में अच्छा सन्देश जाएगा. सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के दिल्ली स्थित रणनीतिकारों ने मुम्बई कांग्रेस को इसी रणनीति पर चलने का संकेत दिया है.

नोटबंदी एवं अन्य दूसरे मुद्दों पर शिवसेना का सरकार विरोध के कारण कांग्रेस में शिवसेना के प्रति सहानुभूति पैदा हुई है. मुंबई सहित राज्य के अन्य महापालिका और जिला परिषदों के चुनाव स्वबल पर लड़ने की उसकी भूमिका के कारण कांग्रेस को यह भरोसा हो गया है कि अब भाजपा अकेली पड़ गई है और उसे राज्य के इन चुनावों में धूल चटाई जा सकती है, भले ही इसका लाभ शिवसेना को क्यों न मिल जाए. इसी रणनीति के तहत मुंबई में शिवसेना को कांग्रेस की अप्रत्यक्ष मदद दिखाई देने लगी है.

कांग्रेस की व्यूहरचना
मुंबई में 25 प्रतिशत जनसंख्या मराठी है, अपनी रणनीति के अनुसार मराठी बहुल भागों में, जहां शिवसेना का उम्मीदवार चुनाव जीत सकता है, वहां कांग्रेस अधिक ताकत नहीं लगाएगी. और जहां मुस्लिम, उत्तर भारतीय, गुजराती, मारवाड़ी, तेलगू आदि गैरमराठी लोगों की बस्ती है, वहां के मतदाता क्षेत्रों में ही अधिक ध्यान देने की व्यूहरचना कांग्रेस करने वाली है. जिन सीटों पर भाजपा का ख़ास उम्मीदवार चुनाव मैदान में है, वहीं कांग्रेस अपना पूरा जोर लगाएगी, भले ही वहां से शिवसेना क्यों न जीते, भाजपा को जीत नहीं मिलनी चाहिए, इसी रणनीति पर कांग्रेस मुम्बई महानगर पालिका के चुनाव में काम करेगी.